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    मंडी में 545 करोड़ से बन रहे हाईवे पर ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही दरक गया डंगा, कोटरोपी में भूस्खलन

    By Mukesh Kumar Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 28 Jul 2026 06:50 PM (IST)

    545 करोड़ रुपये के मंडी-पठानकोट हाईवे के नारला से बिजनी हिस्से में पहली बारिश में ही दरारें और धंसाव आ गया है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए ...और पढ़ें

    मंडी पठानकोट हाईवे पर नारला व पद्धर के बीच क्षतिग्रस्त हुई सड़क। जागरण

    मंडी पठानकोट हाईवे पर नारला व पद्धर के बीच क्षतिग्रस्त हुई सड़क। जागरण

    HighLights

    1. मंडी-पठानकोट हाईवे पर पहली बारिश में ही दरारें व धंसाव।

    2. नारला से बिजनी खंड की 545 करोड़ की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल।

    3. कोटरोपी में भूस्खलन से बड़े वाहनों का यातायात बाधित।

    सहयोगी, पद्धर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश में मंडी-पठानकोट हाईवे के 545 करोड़ रुपये से स्तरोन्नत हिस्से नारला से बिजनी के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा दिए हैं। पहली मूसलाधार बारिश में ही कई जगह सड़क धंस गई है और दरारें पड़ गई हैं। सबसे गंभीर स्थिति टांडू के समीप देखने को मिली, जहां डंगा बैठ जाने से सड़क का बड़ा हिस्सा दरक गया। राहत की बात यह रही कि मैगल पुल का निर्माण अभी पूरा न होने के कारण इस मार्ग पर यातायात शुरू नहीं हुआ है, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

    टांडू के अलावा द्रंग क्षेत्र के भटोग और डवारडू के समीप भी सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। इससे सड़क के और अधिक धंसने की आशंका बनी हुई है। 

    यहां भी बैठे डंगे

    ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कंपनी स्थायी समाधान करने के बजाय दरारों में केमिकल और कंक्रीट भरकर केवल लीपापोती कर रही है। माणा, नारला और कुन्नू सहित कई स्थानों पर डंगे बैठने लगे हैं और सड़क में दरारें दिखाई देने लगी हैं। वहीं ब्लैक स्पाट नामक स्थान पर भी मलबा और चट्टानें गिरने के कारण यातायात रोक दिया गया। 

    कुन्नू बाजार से पीछे भूस्खलन

    उधर, कुन्नू बाजार के पीछे बने मार्ग पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने से एक लेन पूरी तरह बंद हो गई। निर्माण कंपनी ने एलएनटी मशीन और हाइड्रा मौके पर तैनात कर मलबा हटाकर मार्ग को बहाल कर दिया।

    कोटरोपी में यातायात बंद

    वहीं, कोटरोपी में भूस्खलन के कारण बड़े वाहनों के लिए यातायात बाधित हो गया है। यहां करीब 9 साल पहले पहाड़ दरकने से दो बसें मलबे की चपेट में आ गई थीं, जिसमें करीब 48 लोगों की मौत हो गई थी। 

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