चैत्र नवरात्र में कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त, यहां जानिए पूजा की उपयुक्त व आसान विधि
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जिसके लिए मंदिरों और बाजारों में तैयारियां तेज हैं। इस बार एक तिथि क्षय होने के कारण आठ ही नवरात्र होंगे। श ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के इस बार दो शुभ मुहूर्त हैं।
HighLights
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू, तैयारियां जोरों पर।
कलश स्थापना के लिए 19 मार्च को दो शुभ मुहूर्त।
इस बार एक तिथि क्षय, इसलिए आठ नवरात्र होंगे।
जागरण संवाददाता, शिमला। 19 मार्च से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र के लिए मंदिरों व बाजार में तैयारी तेज है। नवरात्र में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। शिमला के टेकरी मंदिर तवी के पुजारी पंडित चंद्र शेखर डिमरी ने बताया कि वीरवार को सुबह सात से आठ बजे तक तथा दोपहर 12:05 से एक बजे तक कलश स्थापित कर सकते है।
पहले नवरात्र की तिथि क्षय है इसलिए इस बार आठ नवरात्र ही हैं। 26 मार्च को रामनवमी मनाई जानी है।
क्यों होती है कलश स्थापना
कलश में सभी देवी-देवताओं का वास होता है और इसे रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सुख-समृद्धि बढ़ती है।
सुबह 7 बजे के बाद शुभ मुहूर्त
वहीं काली बाड़ी मंदिर के सचिव डा. कालोल प्रमाणिक ने कहा पहले नवरात्र के दिन सुबह सात बजे के बाद कलश स्थापना के लिए सही समय है। मंदिर में भंडारे व प्रसाद के लिए सिलिंडर की व्यवस्था करने पर काम किया जा रहा है। सफलता मिली तो पहले नवरात्र से ही इसकी व्यवस्था कर दी जाएगी।
क्या रहेगी पूजा की विधि
कलश स्थापित करने के लिए सबसे पहले स्नान करके भगवान गणेश का नाम लें और मंदिर को सजाएं। इसके बाद पात्र में मिट्टी डालकर जौ के बीज डालें और ज्योति जलाएं। तांबे के कलश पर मौली बांधकर उस पर स्वास्तिक बनाएं। कलश के ऊपर आम या अशोक के पांच पत्ते लगाएं और नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर रखें। इस कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के बीच रख दें।