अलगाववाद, पाकिस्तान व लद्दाख... US राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर दौरे के 5 बड़े कूटनीतिक संदेश, भारत के लिए क्यों रहा खास?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का तीन दिवसीय दौरा किया, अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह पहला दौरा था। ...और पढ़ें

US राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर दौरे के 5 बड़े कूटनीतिक संदेश। फोटो जागरण
HighLights
अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया।
अलगाववादियों से दूरी बनाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्राथमिकता दी गई।
घाटी में शांति और सामान्य स्थिति की सराहना, पाकिस्तान को झटका।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर अपने तीन दिवसीय दौरे जम्मू-कश्मीर से लौट आए। उन्होंने श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर का यह पहला आधिकारिक दौरा था। राजनीतिक और कूटनीतिक के दृष्टिकोण से इस यात्रा के क्या मायने थे और भारत के लिए यह यात्रा कितनी सफल और अनुकूल रही?
यात्रा के प्रमुख मायने
भारत के पक्ष पर अमेरिकी मुहर
सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बताया और घाटी की सुरक्षा, स्थिति व शांतिपूर्ण माहौल की सराहना की। इस बात का सीधा संकेत है कि वाशिंगटन अब कश्मीर को भारत का स्वाभाविक और अभिन्न क्षेत्र के रूप में देखता है।
अलगाववादियों से बनाई दूरी
अपने दौरे के दौरान सर्जियो गोर ने किसी भी अलगाववादी नेता या हुर्रियत प्रतिनिधि से मुलाकात नहीं की। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्राथमिकता देते हुए केवल उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। जो भारत की संवैधानिक व्यवस्था को सीधी कूटनीतिक मान्यता देता है।
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पाकिस्तान को झटका
जम्मू-कश्मीर को भारत का अहम हिस्सा बतान के बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक तंत्र हिल गया। अमेरिकी राजदूत का डल झील में बेफिक्र होकर शिकारा की सवारी की। स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की। इसका साफ संकेत है कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है।
अमेरिका से और मजबूत होंगे रिश्ते
सर्जियो गोर की सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। गोर ने जहां जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा सुधारों की सराहना की, वहीं सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि आने वाले वर्षों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच संपर्क एवं सहयोग और अधिक गहरा होगा।
लद्दाख की रणनीतिक अहमियत
लद्दाख की सुरक्षात्मक सीमाएं और पर्यटन क्षमता अमेरिका की भावी रणनीतिक दिलचस्पी को रेखांकित करती है। सीएम के साथ बैठक में पर्यटन, बागवानी और न्यू-इकोनॉमी में अमेरिकी निवेश और सहयोग की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारत के लिए यात्रा कितनी अनुकूल रही?
तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का भ्रम समाप्त
इस यात्रा से साफ हो गया कि अमेरिका अब कश्मीर को केवल भारत-पाकिस्तान विवाद के चश्मे से देखने के बजाय भारत के साथ अपने व्यापक द्विपक्षीय और रणनीतिक संबंधों के ढांचे में देख रहा है।
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद की स्थिति को वैश्विक स्वीकार्यता
2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद विदेशी राजनयिकों की इस स्तर की अनौपचारिक व सहज आवाजाही से घाटी में बदले सकारात्मक माहौल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली है।
वैश्विक पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा
अमेरिकी राजदूत द्वारा कश्मीरी क्राफ्ट्स और लद्दाख पर्यटन की सराहना किए जाने से क्षेत्र के हस्तशिल्प उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक मंच पर बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
15 साल बाद अमेरिकी राजदूत की सीएम से मुलाकात
15 साल बाद बाद अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर के पदासीन मुख्यमंत्री से मुलाकात की। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को राजदूत गोर के श्रीनगर दौरे के कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है। पिछले 25 वर्षों में पीडीपी के किसी नेता से मुलाकात करने वाले एकमात्र अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल थे, जिन्होंने दिसंबर 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से मुलाकात की थी।
अमेरिकी राजदूत से क्या थी महबूबा मुफ्ती की मांग
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि कश्मीर जाने के बारे में जारी की गई सबसे सख्त ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करें और उसे वापस ले लें।
