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    बोकारो में मिड-डे मील का संकट: 123 स्कूलों पर ₹1 करोड़ का बकाया, 4 स्कूलों में चूल्हा बंद

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 03:15 PM (IST)

    बोकारो के कसमार प्रखंड में मध्याह्न भोजन योजना को गहरा झटका लगा है, जहां 123 स्कूलों का लगभग एक करोड़ रुपये बकाया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 123 स्कूलों का एक करोड़ रुपये मध्याह्न भोजन बकाया।

    2. खाद्यान्न व बजट अभाव से चार स्कूलों में एमडीएम बंद।

    3. गरीब बच्चे भूखे पेट घर लौटने को मजबूर हुए।

    संवाद सहयोगी, कसमार (बोकारो)। सरकार के कुपोषण मुक्त सूबे के दावों और 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' के नारे को कसमर प्रखंड में गहरा झटका लगा है। खाद्यान्न (चावल) और बजट आवंटन के अभाव के कारण प्रखंड के 123 प्राथमिक, मध्य एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) का लगभग एक करोड़ रुपया बकाया हो गया है।

    इस भारी-भरकम राशि के भुगतान न होने और बाजार में उधारी की सीमा पूरी तरह खत्म होने के कारण प्रखंड के चार स्कूलों में गुरुवार से मध्याह्न भोजन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इस संबंध में उत्क्रमित मध्य विद्यालय चंडीपुर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय चौड़ा-दो एवं क्षेत्रनाथ प्लस टू उच्च विद्यालय हरनाद सहित चार विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों ने प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) को लिखित आवेदन सौंप दिया है।

    स्कूल के प्रभारियों ने साफ कहा है कि एक जुलाई से विद्यालयों में न तो राशि का आवंटन है और न ही चावल उपलब्ध है, ऐसी स्थिति में एमडीएम को तत्काल प्रभाव से बंद किया जा रहा है। चास प्रखंड के विभागीय स्तर पर सरकारी विद्यालयों में चावल उपलब्ध कराया गया है। कुछ विद्यालयों में चावल खत्म हो रहा है। इसकी रिपोर्ट मंगाई जा रही है।

    आधे से अधिक स्कूल उधारी की बैसाखी पर चल रहे

    प्रखंड के अन्य स्कूलों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। वहां एमडीएम अभी बंद तो नहीं हुआ है, लेकिन स्कूल पूरी तरह कर्ज में फंसे हैं। स्कूल के प्रभारी शिक्षक और संयोजिका स्थानीय राशन दुकानदारों के पास व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर उधारी मांगकर जैसे-तैसे बच्चों की थाली सजा रहे हैं।

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    दुकानदारों ने भी साफ कह दिया है कि पुराना बकाया मिले बिना अब और राशन नहीं मिलेगा। वहीं महीनों से हरी सब्जियों, मसालों, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर के लिए मिलने वाली परिवर्तन लागत विभाग द्वारा जारी नहीं की गई है। इसके साथ ही रसोइयों का मानदेय भी महीनों से बकाया है।

    भूखे पेट घर लौटने को मजबूर हुए बच्चे

    कसमर के ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश गरीब और मजदूर वर्ग के बच्चे इसी मध्याह्न भोजन के भरोसे स्कूल आते हैं। कई बच्चों के माता-पिता सुबह-सुबह मजदूरी पर निकल जाते हैं, इस उम्मीद में कि उनके बच्चे को स्कूल में भरपेट और पौष्टिक भोजन मिल जाएगा। गुरुवार को जब इन चार स्कूलों में दोपहर को चूल्हा नहीं जला, तो स्थिति यह थी कि कई बच्चे आधी छुट्टी में ही भूख के मारे घर लौटने को मजबूर हो गए।

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    मामला संज्ञान में आया है। कसमर प्रखंड के कुछ स्कूलों में आवंटन और खाद्यान्न की तकनीकी समस्या है। जिला मुख्यालय को इस संबंध में पत्र भेजा गया है। बकाया राशि के भुगतान और चावल की आपूर्ति के लिए त्वरित प्रयास किए जा रहे हैं, जल्द ही व्यवस्था बहाल होगी।

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     प्रतिमा दास, बीईईओ कसमार।