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    गिरिडीह से कोडरमा पहुंचा हाथियों का झुंड, फसल और घरों को किया बर्बाद, वन विभाग की पहल से टला बड़ा खतरा

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 02:33 PM (GMT+05:30)

    गिरिडीह में उत्पात मचाने और एक युवक की जान लेने के बाद हाथियों का झुंड कोडरमा के पपीलो जंगल में प्रवेश कर गया। वन विभाग के समन्वय के बाद हाथियों को को ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. बिरनी में उत्पात मचाने के बाद कोडरमा पहुंचा हाथियों का झुंड।

    2. एक युवक की जान ली, फसलें और चारदीवारी नष्ट की।

    3. वन विभाग के समन्वय से हाथियों को कोडरमा जंगल में प्रवेश।

    संवाद सहयोगी, बिरनी (गिरिडीह)। बिरनी के विभिन्न गांवों में पिछले पांच दिनों से उत्पात मचाते हुए एक युवक की जान लेने के बाद हाथियों का झुंड अपनी दिशा लेकर कोडरमा जिला के पपीलो जंगल मे प्रवेश होने के लिए निकला, लेकिन सीमा पर कोडरमा जिला के तैनात वन विभाग के कर्मियों ने हाथियों को प्रवेश नहीं होने दिया।

    इसे लेकर कोडरमा और गिरिडीह वन विभाग के कर्मियों के बीच मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक वाकयुद्ध चलता रहा। आखिरकार बुधवार सुबह छह बजे गिरिडीह वन विभाग के कर्मियों ने हाथियों के झुंड को कोडरमा जिला के पपीरो जंगल में प्रवेश कराकर राहत की सांस ली।

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    मुरैना व चानो में मचाया उत्पात

    हाथियों के झुंड ने मंगलवार रातभर उत्पात मचा कर बुधवार सुबह मुरैना से निकलकर बिरनी के चानो गांव में उत्पात मचाया। झुंड ने कई कई किसानों व ग्रामीणों की चारदीवारी को ध्वस्त कर खड़ी फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। ग्रामीणों ने रातभर जागकर मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की।

    सीमा पर रोकने से वापस लौट जाता था झुंड

    वन विभाग के कर्मियों योगेंद्र प्रसाद व अबोध महथा ने बताया कि हाथियों का झुंड अपना रास्ता लेकर पश्चिम दिशा की ओर ही जा रहा था, जिधर से वह आया था। लेकिन सीमा पर कोडरमा वन विभाग के द्वारा बार-बार प्रवेश रोक दिया जाता था, जिसके कारण हाथियों का झुंड पुनः वापस बिरनी क्षेत्र में लौट जाता था और गांवों में नुकसान पहुंचाता था। इसी को लेकर दोनों जिलों के वनकर्मियों के बीच मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक बहस और वाकयुद्ध की स्थिति बनी रही।

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    कोडरमा के पपीलो जंगल में किया प्रवेश

    आखिरकार बुधवार सुबह 6 बजे दोनों जिला के वन कर्मियों का आपसी समन्वय के बाद हाथियों के झुंड को कोडरमा के पपीलो जंगल में प्रवेश करा दिया गया। इसके बाद गिरिडीह वन विभाग के कर्मियों ने राहत की सांस ली।

    फिलहाल सीमा पर गिरिडीह वन विभाग के कर्मी तैनात हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं, ताकि हाथी वापस इस क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें। ृवन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी सतर्क रहें और जंगल की ओर न जाएं।

    प्रभावित गांव व सीमा पर अवस्थित गांव के ग्रामीण भयभीत: सीमा पर अवस्थित गांव व प्रभावित गांव के ग्रामीणों व किसान अब भी भयभीत है। क्योंकि हाथियों के झुंड पुनः वापस होने की उम्मीद लगा बैठे है। इससे सभी भयभीत है।

    कई बारऐसा दिखा गया है कि वन विभाग के कर्मियों ने दूर तक हांथीयों को पहुंचा दिया लेकिन छह घण्टे में वापस हो जाता था। कहीं उसी तरह फिर तो वापस नही हो जाय। ग्रामीण कमलकांत सिंह मनोज यादव , रोहित दास ने कहा कि हांथियों के पीछे पीछे वन विभाग व स्पेशल टीम जरूर चल रहा है। लेकिन उनके पास संसाधन पर्याप्त मात्रा में नही है।

    इसी कारण हाथियों का झुंड गांव में प्रवेश कर नुकसान पहुंचा रहा है। सरकार व वन विभाग ने हांथीयों ने किसी व्यक्ति को कुचल मार देता है तो उसे 10 लाख मुआवजा देता है। अनमोल जीवन का मूल्य लगा रखा है। यदि किसी कारण हाथी की मौत हो जाती है तो विभाग अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करता है। ऐसे में ग्रामीण भी परेशान होते हैं। यही कानून है।

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