घोड़थंबा कांड: जब खून से खेली गई थी होली, गिरीडीह में 2 समुदायों की लड़ाई में उजड़ गए थे कई परिवार
धनवार में चुनाव के बाद अब होली का माहौल है, लेकिन पिछले साल घोड़थंबा में हुई हिंसा की घटना को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। पिछली होली पर जुलूस के विवाद ...और पढ़ें
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झारखंड में होली की बुरी यादें। फाइल फोटो
HighLights
पिछले साल घोड़थंबा में होली पर हुई थी भीषण हिंसा।
प्रशासन इस बार जीरो टॉलरेंस मोड पर, कड़ी निगरानी।
समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
पवन कुमार बरनवाल, धनवार। धनवार नगर पंचायत में चुनाव परिणाम आने के बाद अब सियासी गर्मी की जगह होली का रंग घुलने लगा हैं। वार्डों में नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के समर्थक होली मिलन समारोह हो रहा है।
युवा टोली साफ-सफाई, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक जुलूस की रूपरेखा तय कर रही है। बाजारों में रंग-गुलाल और पिचकारियों की दुकानें सज चुकी हैं, जिससे त्योहार की रौनक साफ झलकने लगी है, लेकिन पिछली हाेली में घोड़थंबा में हुई झड़प, आगजनी की घटना आज भी जेहन में आते ही लोग सिहर उठते हैं।
ऐसे में पूरे धनवार क्षेत्र में इस बार उत्साह के साथ-साथ एहतियात भी है। प्रशासन बीते वर्ष की झड़प की घटना से सबक लेते हुए पूरी तरह सतर्क है।
क्या हुआ था पिछले वर्ष
पिछले वर्ष होली के दिन घोड़थंबा ओपी से महज 20 मीटर की दूरी पर शाम में जुलूस के मार्ग को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दो समुदायों के बीच जमकर पथराव और पेट्रोल बमबाजी हुई। उपद्रवियों ने 9 गुमटियों सहित कई दुकानें, नौ मोटरसाइकिल, दो कार और एक आटो को आग के हवाले कर दिया था।
करीब ढाई घंटे तक बाजार रणक्षेत्र में तब्दील रहा। सड़कें पत्थरों और टूटे शीशों से पटी रहीं और आग की लपटें दुकानों को निगलती रहीं। स्थिति इतनी भयावह थी कि स्थानीय दमकल आग पर काबू पाने में नाकाम रहा।
बाद में अतिरिक्त बल और दमकल की मदद से देर रात हालात नियंत्रित किए गए।घटना के बाद 80 लोगों को नामजद और 250 अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
उजड़ गए थे कई परिवार के घर
हिंसा की आग में कई गरीबों की रोजी-रोटी जल गई। फल, पूजा सामग्री, भूंजा, पान और सैलून की छोटी-छोटी दुकानें खाक हो गईं। वर्षों की मेहनत एक रात में राख में बदल गई। कई परिवार आज भी उस सदमे को याद कर सिहर उठते हैं।
इस बार प्रशासन जीरो टालरेंस मोड पर
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार किसी भी सूरत में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, फ्लैग मार्च, सीसीटीवी निगरानी और शांति समिति की लगातार बैठकें की जा रही हैं।
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अधिकारियों ने दोनों समुदायों के गणमान्य लोगों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के साथ संवाद स्थापित कर सामंजस्य बनाने पर जोर दिया है। समाजसेवियों ने भी प्रशासन को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है।
सौहार्द की नई शुरुआत की उम्मीद
चुनावी सरगर्मी के बाद अब नगरवासी होली को भाईचारे और एकता के प्रतीक के रूप में मनाने की तैयारी में हैं। प्रशासन और समाज के साझा प्रयास से उम्मीद की जा रही है कि इस बार धनवार शांति, सौहार्द और प्रेम के रंग में रंगा नजर आएगा ताकि बीते वर्ष की कड़वी यादें दोहराई न जाएं, बल्कि उनसे सीख लेकर नई मिसाल कायम हो।