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    टपकती छत, लटकती फॉल्स सीलिंग... हजारीबाग में हर दिन मौत के साए में ड्यूटी निभा रहे कर्मचारी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 05:32 PM (IST)

    हजारीबाग के दीपुगढ़ा स्थित ग्रामीण कार्य विभाग का कार्यालय जर्जर हालत में है, जहाँ कर्मचारी हर दिन जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ग्रामीण कार्य विभाग का कार्यालय जर्जर, छत टपकती।

    2. कर्मचारी मौत के साए में काम करने को मजबूर।

    3. नए भवन के लिए डीपीआर तैयार, जल्द निर्माण की उम्मीद।

    विनय कुशवाहा, हजारीबाग। दीपुगढ़ा स्थित ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल, हजारीबाग का कार्यालय इन दिनों अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है।

    विडंबना यह है कि जिस कार्यालय से हजारीबाग, चतरा, रामगढ़ और कोडरमा जिले की ग्रामीण सड़कों के निर्माण, मरम्मत और करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की निविदाओं का संचालन होता है, वही कार्यालय आज जर्जर भवन में संचालित हो रहा है।

    हर वर्ष यहां से 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक की ग्रामीण सड़क योजनाओं की निविदाओं का निष्पादन किया जाता है, लेकिन इन योजनाओं को गति देने वाले कर्मचारी खुद असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं।

    कार्यालय का भवन वर्षों पुराना है। इसकी छत अलबेस्टर शीट की बनी है, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बारिश के दौरान लगभग पूरे भवन में पानी टपकता है।

    दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और अंदर लगी फॉल्स सीलिंग जगह-जगह टूटकर लटक रही है। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय में बैठते ही मन में यही डर बना रहता है कि पता नहीं कब छत या फॉल्स सीलिंग का कोई हिस्सा गिर पड़े और बड़ा हादसा हो जाए।

    स्थिति इतनी खराब है कि सरकारी दस्तावेजों और महत्वपूर्ण फाइलों को सुरक्षित रखना भी चुनौती बन गया है। कर्मचारियों को दिनभर फाइलें इधर-उधर हटानी पड़ती हैं ताकि उन पर पानी न गिरे। बारिश के समय पूरे परिसर में पानी टपकने के कारण कार्यालय का सामान्य कामकाज भी प्रभावित होता है।

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    कार्यालय के दरवाजे और खिड़कियां भी टूट चुकी हैं। कई खिड़कियों को प्लास्टिक के बोरे लगाकर बंद किया गया है, ताकि बारिश का पानी अंदर न आए। भवन के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। कर्मचारियों को यह भी चिंता सताती है कि कार्यालय बंद होने के बाद कहीं असामाजिक तत्व महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को नुकसान न पहुंचा दें।

    कंप्यूटर ऑपरेटर अनीश कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में कंप्यूटरों को प्लास्टिक से ढंककर रखना मजबूरी बन गई है। डर बना रहता है कि यदि पानी कंप्यूटर पर गिर गया तो वर्षों का महत्वपूर्ण सरकारी डाटा नष्ट हो सकता है। यही कारण है कि खिड़कियों को भी प्लास्टिक के बोरे लगाकर बंद रखा जाता है, ताकि बारिश का पानी अंदर प्रवेश न कर सके।

    विभाग के प्रधान लिपिक संतोष कुमार ने बताया कि भवन की मरम्मत हुए कई वर्ष बीत चुके हैं। अब यह कार्यालय भवन काम करने योग्य नहीं रह गया है। कर्मचारी हर दिन भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। बरसात के समय सबसे अधिक परेशानी होती है, क्योंकि पूरा भवन टपकता है और फॉल्स सीलिंग गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है।

    उन्होंने बताया कि भवन प्रमंडल द्वारा नए कार्यालय भवन के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर ली गई है। स्वीकृति मिलते ही नए भवन का निर्माण शुरू होगा। कर्मचारियों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें सुरक्षित भवन में कार्य करने का अवसर मिलेगा।

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