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    जमशेदपुर में ब्रेन मलेरिया का कहर: 4 बच्चों की मौत के बाद विभाग अलर्ट; 108 डॉक्टरों की टीम घर-घर करेगी सर्वे

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 11:36 AM (IST)

    पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के प्रकोप से चार आदिवासी बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है। 108 डॉक्टरों ...और पढ़ें

    कैंप में मलेरिया की जाँच करते हुए

    कैंप में मलेरिया की जाँच करते हुए

    HighLights

    1. पोटका में ब्रेन मलेरिया से चार आदिवासी बच्चों की मौत।

    2. 108 डॉक्टरों की टीम घर-घर कर रही है सर्वे।

    3. तीन साल से डीडीटी छिड़काव न होने पर सवाल।

    संवाद सूत्र, पोटका। पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का बढ़ता प्रकोप अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। लगातार बढ़ते मामलों और चार आदिवासी बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पोटका, मुसाबनी, घाटशिला और डुमरिया प्रखंड में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। बुधवार से इन चारों प्रखंडों में विशेष मेडिकल टीमें तैनात की जाएंगी।

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कालेज अस्पताल के 108 चिकित्सकों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। प्रत्येक टीम में 25-25 चिकित्सकों के साथ आठ वरीय चिकित्सकों को शामिल किया गया है।

    चिकित्सकों की टीम अगले दो दिनों तक मलेरिया प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे करेगी, लोगों की जांच करेगी, जागरूकता अभियान चलाएगी और मलेरिया से बचाव के हर संभव उपाय बताएगी।

    एमजीएम कालेज के प्राचार्य डा. संजय कुमार ने बताया कि टीमों को निर्देश दिया गया है कि यदि किसी भी गांव में कोई संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसे तत्काल बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल या एमजीएम अस्पताल रेफर किया जाए।

    जिला प्रशासन भी अलर्ट, बीमारी फैलने के कारणों की होगी जांच

    मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक चिंता बढ़ गई है। मंगलवार शाम जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिविल सर्जन और अन्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

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    बैठक में स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठाने का निर्णय लिया गया। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बीमारी किन कारणों से तेजी से फैली, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।

    507 लोगों की जांच, 51 नए मरीज मिले

    मंगलवार को पोटका के विभिन्न गांवों में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में 507 लोगों की जांच की गई, जिसमें 51 नए मलेरिया संक्रमित मरीज मिले। सबरनगर, कांदर, जोजोगोड़ा, गाम्हीरकोचा, छोटा रामगढ़, कुंदरुकोचा, झरिया और टांगराईन समेत कई गांवों में विशेष जांच अभियान चलाया गया।

    संक्रमित मरीजों को मौके पर ही दवा उपलब्ध कराई गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में दो नए मरीज जोबा हांसदा और विकास मार्डी को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया है। पहले से पांच मरीज अस्पताल में इलाजरत हैं।

    मंगलवार को सीओ निकीता बाला और बीडीओ अरुण कुमार मुंडा ने प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। जिला स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान को और तेज करते हुए 12 टीमों को प्रतिनियुक्त किया है।

    चार बच्चों की मौत के बाद उठे विभागीय लापरवाही के सवाल

    ब्रेन मलेरिया से चार आदिवासी बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और मलेरिया नियंत्रण अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे हृदयविदारक घटना हरिणा पंचायत के कंदर गांव में सामने आई, जहां चार दिनों के भीतर महावीर सरदार की दो बेटियों की मौत हो गई। उनकी तीसरी बेटी भी बुखार से पीड़ित है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचाराधीन है।

    चिकित्सकों के अनुसार, उसकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। महावीर सरदार ने आरोप लगाया कि यदि 15 दिन पहले डीडीटी और अन्य दवाओं का छिड़काव किया गया होता तथा मच्छरदानियों का वितरण हुआ होता तो उनकी बेटियों की जान बच सकती थी।

    उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से न तो डीडीटी का छिड़काव हुआ और न ही मच्छरदानी मिली। कंदर के ग्राम प्रधान रामेश्वर सरदार ने बताया कि बरसात से पहले ग्रामसभा के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया था, लेकिन मलेरिया विभाग ने न तो जल स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर डलवाया और न ही समय पर दवा का छिड़काव कराया। उन्होंने प्रभावित गांवों में तत्काल मच्छरदानी वितरण की मांग की।

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