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    MGM में 48 घंटे में 3 मरीजों की मौत पर भारी हंगामा; स्ट्रेचर नहीं मिला, तो बच्चे के शव को गोद में लेकर निकले परिजन

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 12:05 AM (GMT+05:30)

    जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 48 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। एक घटना में, स्ट्रेचर ...और पढ़ें

    एमजीएम की तस्‍वीर।

    एमजीएम की तस्‍वीर।

    HighLights

    1. एमजीएम अस्पताल में 48 घंटे में तीन मरीजों की मौत।

    2. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कालेज अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। बीते 48 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद अस्पताल में आक्रोश का माहौल बन गया है।

    रविवार को दो अलग-अलग मामलों में मौत होने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। लगातार हो रही मौतों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    भुइयांडीह कानू भट्ठा निवासी श्रवण कुमार की मौत के बाद उनके स्वजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताया। परिजनों के अनुसार, श्रवण कुमार के पैर में सूजन थी और रविवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल लाया गया।

    यहां पर चिकित्सकों ने जांच के बाद पैर पर दवा लगाकर पट्टी की और कुछ घंटों तक निगरानी में रखने के बाद कहा कि मरीज को चाहें तो भर्ती रख सकते हैं, अन्यथा घर भी ले जा सकते हैं। मृतक के छोटे भाई आशीष कुमार ने बताया कि डाक्टरों की सलाह के बाद वे श्रवण को घर ले गए, लेकिन शाम होते-होते उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

     

    मौत के बाद उठे कई सवाल 

    परिजनों का कहना है कि यदि मरीज की हालत गंभीर थी तो उन्हें घर ले जाने की सलाह क्यों दी गई। उनका आरोप है कि उन्हें बीमारी की वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया गया। साथ ही इलाज की प्रक्रिया और चिकित्सकीय निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 

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    मधुमेह पीड़ित बच्चे की मौत पर फूटा गुस्सा

    दूसरी घटना आदित्यपुर निवासी एक परिवार से जुड़ी है। परिजनों के अनुसार, उनका बेटा मधुमेह से पीड़ित था और उसकी हालत गंभीर होने पर उसे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    मृतक के स्वजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध थे और न ही आवश्यक सुविधाएं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि बच्चे की मौत के बाद शव को ले जाने के लिए उन्हें स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजन अस्पताल के अलग-अलग विभागों में स्ट्रेचर की तलाश करते रहे, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली।  

     

    स्ट्रेचर नहीं मिला, गोद में लेकर निकले परिजन 

    परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने उन्हें एक-दूसरे विभाग में भेजकर टाल दिया। अंततः मजबूर होकर परिजन बच्चे के शव को गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकले।

    इतना ही नहीं, उन्हें शव वाहन की सुविधा भी नहीं मिल सकी। बाद में परिवार को निजी साधन से शव घर ले जाना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

     

    लगातार तीसरी मौत से बढ़ा आक्रोश 

    गौरतलब है कि शनिवार को भी एक मरीज की मौत के बाद उसके स्वजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था। अब 48 घंटे के भीतर तीसरी मौत सामने आने से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।

    लगातार उठ रहे आरोपों के बीच सवाल यह है कि आखिर एमजीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार कब होगा और मरीजों तथा उनके परिजनों को राहत कब मिलेगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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