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    पोटका में ब्रेन मलेरिया बेकाबू: तीसरे दिन 1193 जांच में 133 संक्रमित मिले; 4 रेफर, गांवों में दहशत

    By Shankar GuptaEdited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Wed, 01 Jul 2026 08:36 PM (GMT+05:30)

    पूर्वी सिंहभूम के पोटका में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है, तीसरे दिन 1193 जांचों में 133 लोग संक्रमित पाए गए। चार गंभीर मरीजों को जमशेदपुर के एमज ...और पढ़ें

    HighLights

    1. पोटका में ब्रेन मलेरिया के 133 नए मामले मिले।

    2. चार गंभीर मरीजों को एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर रेफर किया गया।

    3. ग्रामीणों ने समय पर डीडीटी छिड़काव न होने पर आक्रोश व्यक्त किया।

    संसू, पोटका। झारखंड में पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप फैलता जा रहा है। संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों ने जहां स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है, वहीं सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। 
     
    बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की 24 विशेष टीमों द्वारा विभिन्न प्रभावित गांवों में सघन जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान रिकॉर्ड 1,193 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 
     
    इसमें से 133 लोग ब्रेन मलेरिया से संक्रमित पाए गए। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के मिलने से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

    चार मरीज एमजीएम अस्पताल रेफर  

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), पोटका में वर्तमान में 9 ब्रेन मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से चार मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) और सदर अस्पताल रेफर किया गया है। 
     
    वहीं, पांच मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार भर्ती मरीजों की कड़ाई से निगरानी कर रही है। 
     

    जांच का दायरा बढ़ते ही बढ़े संक्रमित  

    पोटका में पिछले तीन दिनों के आंकड़े दर्शाते हैं कि संक्रमण कितनी तेजी से पैर पसार रहा है। पहले दिन जहां 464 लोगों की जांच में 28 संक्रमित मिले थे, वहीं दूसरे दिन जांच बढ़ने पर 507 लोगों में 51 मरीज मिले। 
     
    तीसरे दिन जब जांच का दायरा व्यापक करते हुए 1,193 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, तो संक्रमितों की संख्या सीधे 133 पर पहुंच गई। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर ला दिया है।
     

    मलेरिया नियंत्रण के लिए 108 डॉक्टर तैनात  

    बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला स्तर पर चार विशेष मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। कुल 108 चिकित्सकों को प्रभावित चार प्रखंडों में आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया गया है। 
     
    अकेले पोटका में ही 17 डॉक्टरों की टीम प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर ब्लड स्लाइड बनाने, त्वरित उपचार करने और दवा वितरण के कार्य में जुटी है। 
     
    इसके साथ ही, ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मच्छरदानी के नियमित उपयोग, साफ-सफाई रखने तथा बुखार होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी जा रही है। 
     

    समय पर डीडीटी छिड़काव न होने से ग्रामीणों में आक्रोश  

    जंगल से सटे इस पूरे क्षेत्र में हर वर्ष मलेरिया के मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार ब्रेन मलेरिया का प्रकोप पहले की तुलना में कहीं अधिक जानलेवा साबित हो रहा है। 
     
    स्थानीय ग्रामीणों ने मलेरिया विभाग पर समय रहते उचित कदम न उठाने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग पहले से सतर्क रहता और गांवों में समय पर डीडीटी (DDT) छिड़काव, लार्वा नियंत्रण, मच्छरदानी वितरण करता तो आज हालात इतने भयावह नहीं होते। 
     
    क्षेत्र के चार मासूम बच्चों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। बढ़ते संक्रमण के बीच अब ग्रामीणों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की आगे की कार्रवाई और इस जानलेवा बीमारी पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के प्रयासों पर टिकी हैं।

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