Tata Steel का मास्टरस्ट्रोक: युद्ध के कारण रुकी गैस की सप्लाई, तो टाटा ने खोज निकाला ये अनोखा तरीका
टाटा स्टील जमशेदपुर अपने चार डाउनस्ट्रीम प्लांट को हाइड्रोजन व नाइट्रोजन मिक्सचर (HNX) से चलाएगा। वैश्विक LPG/प्रोपेन गैस की किल्लत के कारण यह नया प्र ...और पढ़ें

टाटा स्टील जमशेदपुर में हाइड्रोजन-नाइट्रोजन से चलेंगे चार प्लांट।
HighLights
चार डाउनस्ट्रीम प्लांट हाइड्रोजन-नाइट्रोजन मिक्सचर (HNX) से चलेंगे।
वैश्विक LPG/प्रोपेन गैस किल्लत के कारण नया विकल्प अपनाया।
कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी, 2045 नेट जीरो लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : टाटा स्टील में हाइड्रोजन व नाइट्रोजन मिक्सचर (एचएनएक्स) से डाउनस्ट्रीम के चार प्लांट चलेंगे। टाटा स्टील प्रबंधन ने वैश्विक परिस्थिति के कारण उत्पन्न किल्लत के बाद नए विकल्प पर प्रयोग कर रही है।
अमेरिका व इजराइल का ईरान से चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) व प्रोपेन गैस की किल्लत हो गई जिसका असर कंपनी के उत्पादन पर भी पड़ा।
ऐसे में टाटा स्टील के चार डाउनस्ट्रीम प्लांट (सीआरएम बारा, ट्यूब्स डिवीजन, टिनप्लेट व वायर डिवीजन) में नया प्रयोग किया गया। यहां हाइड्रोजन व नाइट्रोजन को मिलाकर प्लांट को चलाया जा रहा है।
टाटा स्टील का मासिक कार्यक्रम एमडी आनलाइन सोमवार को संपन्न हुआ। इस दौरान डाउनस्ट्रीम डिवीजन के वाइस प्रेसिडेंट उज्जवल चक्रवर्ती ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्लांट पहले एलपीजी और प्रोपेन गैस से संचालित होता था लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के बाद जब इन गैसों की किल्लत हुई तो हम नए विकल्प की तलाश में थे।
प्रतिवर्ष नवंबर में लिया जाने वाला प्लांट शटडाउन को हमने अप्रैल में लिया और सिस्टम को अपग्रेड किया। इसके बाद हाइड्रोजन व नाइट्रोजन का विकल्प तैयार कर उसे उत्पादन प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने का काम किया जा रहा है।
वहीं, टाटा स्टील मीरामंडली के वाइस प्रेसिडेंट सुधीर कुमार मेहता ने भी एमडी ऑनलाइन के माध्यम से कर्मचारियों को जानकारी दी है कि प्रोपेन व एलपीजी गैस की दिक्कत के बाद प्लांट को पांच दिन पहले शटडाउन लेकर सिस्टम को अपग्रेड किया गया।
अब प्लांट में कोक ओवेन गैस (सीओ) गैस से संचालित करने की पहल की जा रही है।
कार्बन उत्सर्जन हो जाएगा कम
इस नई पहल से स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन बेहद कम हो जाएगा। नए विकल्प के तहत कार्बन डाइ-आक्साइड के उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
फर्नेस में प्रोटेक्टिव गैस के रूप में इस्तेमाल होने वाले अमोनिया क्रैकिंग सिस्टम के बजाए अब सीधे हाइड्रोजन व नाइट्रोजन का इस्तेमाल होगा। जाे टाटा स्टील के 2045 तक नेट जीरो के लक्ष्य का हिस्सा है।
साथ ही इस पहले से स्टील के आक्सीकरण को रोकने व उसे चमकदार बनाए रखने में भी मददगार होगी। टाटा स्टील में 11 मिलियन टन स्टील उत्पादन में लगभग प्रति टन 25 से 28 मिलियन टन कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन होता है।
नरेंद्रन ने कंपनी में हो रही दुर्घटनाओं पर जताई चिंता
टाटा स्टील के विभिन्न ऑपरेशंस यूनिट में हो रही दुर्घटनाओं पर कंपनी के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है। टाटा स्टील का मासिक कार्यक्रम एमडी आनलाइन सोमवार को संपन्न हुआ।
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इस दौरान टाटा स्टील जमशेदपुर आपरेशंस के वाइस प्रेसिडेंट चैतन्य भानु ने बताया कि अप्रैल माह में लोस्ट टाइम इंज्यूरी (एलटीआई) की तीन दुर्घटनाएं हुई हैं।
जबकि टाटा स्टील कलिंगनगर में दो और मीरामंडली में कुल मिलाकर सात एलटीआइ के मामले सामने आए हैं। इस पर नरेंद्रन ने कहा कि हमें सेफ्टी पर और काम करने की जरूरत है ताकि हम शून्य दुर्घटना लक्ष्य के साथ उत्पादन कर सकें।
सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित हो
उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सेफ्टी मानकों का अनुपालन करनें की बात कहीं। वहीं, कार्यक्रम के दौरान वाइस प्रेसिडेंट (जमशेदपुर ऑपरेशंस) चैतन्य भानु ने बताया कि अप्रैल माह में यहां से 8.32 की तुलना में 8.35 केटू हॉट मेटल का उत्पादन हुआ।
इसमें एलडी-1 में एक दिन में 50 जबकि एलडी-3 में 75 हिट्स दर्ज कर नया रिकार्ड बनाया गया है। वहीं, कलिंगनगर से उत्तम सिंह ने बताया कि प्लांट ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण काम किए हैं।
लेकिन अप्रैल माह में ब्रेकडाउन ज्यादा हुए हैं इसे कम करने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि महाराष्ट्र के खपोली में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल उत्पादन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इसके अलावा थाइलैंड से अनुराग पांडेय ने बताया कि रा मटेरियल का पहला खेप भारत भेजा गया है।
रॉ मटेरियल्स डिवीजन ने लक्ष्य से अधिक किया उत्पादन
कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील रॉ मटेरियल्स डिवीजन के वाइस प्रेसिडेंट सुधीर कुमार ने बताया कि अप्रैल में हमने अच्छा प्रदर्शन किया है। हमने 39.5 मिलियन टन का लक्ष्य था।
उन्होंने बताया कि गर्मी और मानसून को देखते हुए अब अभी से उत्पादन प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए पहल कर रहे हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि ओडिशा स्थित कलामंग कोल ग्रीन फील्ड माइंस से उत्पादन शुरू हो गया है। इसके अलावा झरिया डिवीजन ने भी सभी पैरामीटर को पूरा करते हुए तय लक्ष्य के अनुरूप उत्पादन किया है।