बाघ व हाथियों के कॉरिडोर से हटेगी रेलवे लाइन, झारखंड में 11 किमी ट्रैक 14 किमी तक होगा डायवर्ट
पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से रेलवे लाइन को हटाने का फैसला लिया गया है। नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने तीसरी लाइन के प्रस्ताव को खारिज कर मौजूदा ट्रैक ...और पढ़ें

पलामू टाइगर रिजर्व से हटेगी रेल लाइन, बाघ-हाथी कॉरिडोर को मिलेगा सुरक्षित मार्ग।
HighLights
नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने तीसरी लाइन प्रस्ताव नकारा।
मौजूदा रेल ट्रैक कोर एरिया से डायवर्ट होगा।
टनल से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होगी।
संवाद सूत्र, बेतला (लातेहार)। पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के कोर एरिया से गुजर रही रेलवे लाइन को आखिरकार डायवर्ट करने का फैसला लिया गया है। यह कदम बाघ और हाथियों के महत्वपूर्ण कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर अब स्पष्ट निर्णय सामने आया है, जिसमें तीसरी रेल लाइन बिछाने के प्रस्ताव को खारिज करते हुए मौजूदा रेल ट्रैक को ही कोर एरिया से बाहर शिफ्ट करने की मंजूरी दी गई है।
सोननगर से पतरातू तक रेलवे की तीसरी लाइन परियोजना का काम कई इलाकों में तेजी से आगे बढ़ चुका है, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र इस परियोजना के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था।
यह इलाका बाघों और हाथियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मामले की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब रेलवे विकास निगम ने तीसरी लाइन बिछाने के लिए पीटीआर प्रबंधन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा था।
पीटीआर प्रशासन ने पर्यावरणीय संवेदनशीलता का हवाला देते हुए इसे अस्वीकार कर दिया और रेल लाइन को डायवर्ट करने की सिफारिश की। इसके बाद मामला राज्य वन्यजीव बोर्ड के पास गया और अंततः 2023 में नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत हुआ।
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नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने गहन विचार-विमर्श के बाद तीसरी लाइन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि कोर एरिया में किसी भी नए ट्रैक का निर्माण वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से उचित नहीं है।
इसके बजाय पहले से मौजूद दो रेल लाइनों को ही डायवर्ट कर रिजर्व क्षेत्र से बाहर ले जाने का निर्देश दिया गया। नई योजना के तहत लातेहार जिले के छिपादोहर और हेहेगड़ा रेलवे स्टेशन के बीच लगभग 11 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को बदला जाएगा, जो डायवर्जन के बाद करीब 14 किलोमीटर हो जाएगी।
प्रस्तावित नया ट्रैक केड गांव होते हुए गुजरेगा और अधिकतर हिस्सा पलामू टाइगर रिजर्व के बाहरी क्षेत्र से होकर निकलेगा, जबकि कुछ सौ मीटर हिस्सा रिजर्व क्षेत्र में रहेगा, जहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए टनल का बनाया जाएगा।
इसके लिए रेलवे विकास निगम और पीटीआर प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया है और वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की टीम ने भी विस्तृत अध्ययन कर डायवर्जन के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया है।
वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी है और प्रभावित गांवों के ग्रामीणों से सुझाव एवं मांगें लेकर उनकी समीक्षा की जा रही है ताकि विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
रेल लाइन के रीलोकेशन का प्रस्ताव पारित हो चुका है और डीपीआर भी तैयार है, अब वन क्षेत्र से जुड़े औपचारिक प्रक्रियाओं और जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
रेल लाइन का डायवर्जन बाघ व हाथी कॉरिडोर के लिए बेहतर साबित होगा। इससे वन्य जीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी।
- प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक पीटीआर।
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