परिसीमन को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का बयान, कहा- लोकतंत्र की गुणवत्ता को मिले प्राथमिकता
लोहरदगा के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने का एकमात्र उपाय नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि ...और पढ़ें

सांसद सुखदेव भगत ने परिसीमन पर अपनी राय रखी। जागरण
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सांसद सुखदेव भगत ने परिसीमन पर अपनी राय रखी।
लोकतंत्र की मजबूती सिर्फ सीटों की संख्या से नहीं।
जागरण संवाददाता, लोहरदगा। प्रस्तावित परिसीमन और लोकसभा सीटों की संभावित बढ़ोतरी को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच लोहरदगा के कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने का एकमात्र उपाय नहीं है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर केंद्र सरकार को गंभीरता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लेना चाहिए। सुखदेव भगत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा लोकसभा में 543 सांसद हैं और सभी जनप्रतिनिधियों को जनता की आवाज उठाने तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलता है।
ऐसे में केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वत: मजबूत नहीं हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे संसदीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ सकता है।
सांसद ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था बहुस्तरीय है। राज्यों की सरकारें, जिला परिषद, नगर निकाय और पंचायतें स्थानीय स्तर पर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। संसद का मुख्य दायित्व विदेश नीति, आर्थिक नीति तथा राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रभावी कानून निर्माण और गंभीर विमर्श करना है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रतिनिधियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी जवाबदेही, प्रभावी भागीदारी और नीति निर्माण में सार्थक योगदान से तय होती है। इसलिए परिसीमन पर निर्णय लेते समय केवल सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।