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    पाकुड़ का काकड़बोना स्कूल बना खंडहर; टूटती छत-दरकती दीवारें बनीं 470 बच्चों की जान का खतरा

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 04:10 PM (IST)

    पाकुड़ के काकड़बोना प्राथमिक विद्यालय में 470 छात्र-छात्राएं जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    जर्जर विद्यालय भवन

    जर्जर विद्यालय भवन

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    भारतेंदु त्रिवेदी, पाकुड़। टूटती छत, दरकती दीवारें और हर पल गिरते मलबे का डर यही सच्चाई है काकड़बोना स्कूल की, जहां नौनिहाल किताबों से ज्यादा अपनी सुरक्षा की चिंता में पढ़ने को मजबूर हैं।

    सरकारी दावों की चमक के बीच यह जर्जर स्कूल सिस्टम की हकीकत उजागर कर रहा है। सदर प्रखंड के झिकरहाटी पूर्वी पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय काकड़बोना आज बदहाली और लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। यहां पढ़ने वाले 470 छात्र-छात्राएं हर दिन जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

    वर्षों पुराना भवन अब इस कदर जर्जर हो चुका है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था बेपरवाह बनी हुई है। विद्यालय में कुल नौ कमरे हैं, जिनमें से पांच कमरे पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बची हुई चार कक्षाओं में ही सभी पांच वर्गों की पढ़ाई किसी तरह संचालित की जा रही है।

    हालात ऐसे हैं कि एक ही कक्षा के बच्चों को अलग-अलग कमरों में बांटकर पढ़ाना पड़ रहा है। बच्चों की संख्या अधिक होने पर बैठाने तक की जगह नहीं बचती। सबसे खतरनाक पहलू भवन की जर्जर स्थिति है। जिन कमरों में पढ़ाई हो रही है, उनकी छतें कभी भी गिर सकती हैं और दीवारों में गहरी दरारें साफ दिखाई देती हैं।

    कई बार छत से प्लास्टर और सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों में हर समय डर बना रहता है। विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है। बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है, कई बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

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    बरसात के दिनों में छत टपकने लगती है, जिससे कक्षाएं पानी और कीचड़ से भर जाती हैं और पढ़ाई ठप हो जाती है। काकड़बोना स्कूल की यह तस्वीर न सिर्फ व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है?

    विद्यालय के प्रधानाध्यापक अब्दुल रॉप ने बताया कि जर्जर भवन को गिराकर नया भवन बनाने के लिए विभाग को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

    इधर, प्रखंड शिक्षा विस्तार पदाधिकारी सुमिता मरांडी ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलते ही विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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