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    पाकुड़ में शिक्षकों का 'वेतन वनवास' खत्म: जून अंत तक खाते में आएगी राशि, 9 महीने से अटकी थी सैलरी

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 10:47 AM (IST)

    पाकुड़ जिले के नवनियुक्त सहायक आचार्यों को 9-6 माह से लंबित वेतन का भुगतान अब शपथ पत्र के आधार पर किया जाएगा। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    HighLights

    1. नवनियुक्त सहायक आचार्यों को लंबित वेतन का भुगतान होगा।

    2. शपथ पत्र के आधार पर वेतन देने का निर्णय लिया गया।

    3. जून 2026 तक भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश।

    संवाद सहयोगी, पाकुड़। सितंबर एवं दिसंबर 2025 से वेतन का इंतजार कर रहे जिले के नवनियुक्त सहायक आचार्यों के लिए राहत भरी खबर है। करीब नौ और छह माह से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे शिक्षकों को अब शपथ पत्र के आधार पर लंबित वेतन का भुगतान किया जाएगा।

    जिला शिक्षा अधीक्षक ने सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को जून 2026 के अंत तक हर हाल में लंबित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

    यह निर्णय प्राथमिक शिक्षा निदेशक, झारखंड के निर्देश के अनुपालन में लिया गया है। अब शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के सत्यापन में देरी का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना पड़ेगा। जिन शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों का सत्यापन अभी लंबित है, उन्हें निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र देने के बाद वेतन का भुगतान किया जाएगा।

    डीएसई ने निर्देश दिया है कि जिन नवनियुक्त सहायक आचार्यों का सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाता अब तक नहीं खुला है, उसे तत्काल खोला जाए। साथ ही सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र प्राप्त कर जून के अंतिम कार्य दिवस तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करें।

    यदि कोई पदाधिकारी शपथ पत्र लिए बिना वेतन का भुगतान करता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उसी की होगी। आदेश के अनुसार शपथ पत्र के आधार पर सितंबर 2026 तक वेतन का भुगतान जारी रहेगा। इस अवधि में संबंधित शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन पूरा होना अनिवार्य होगा।

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    डीएसई ने नवनियुक्त शिक्षकों से भी अपील की है कि वे अपने स्तर पर संबंधित विश्वविद्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों से समन्वय स्थापित कर प्रमाण-पत्रों का सत्यापन जल्द पूरा कराएं, ताकि भविष्य में वेतन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

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    जिले के नवनियुक्त सहायक आचार्यों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब जून के अंत तक वेतन मिलने की उम्मीद से शिक्षकों में राहत और संतोष का माहौल है।