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    पलामू में मिला क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट का अकूत खजाना, लैब में जांच के लिए भेजा गया सैंपल

    Updated: Mon, 11 May 2026 12:51 PM (GMT+05:30)

    पलामू के पांकी अंचल के मौजा भांग परसिया क्षेत्र से क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट का अकूत खजाना मिला है। ...और पढ़ें

    पांकी के भांग परसिया में ड्रिल करती मशीन। (जागरण)

    पांकी के भांग परसिया में ड्रिल करती मशीन। (जागरण)

    HighLights

    1. पलामू के पांकी में मिला ग्रेफाइट का विशाल भंडार।

    2. यह खोज क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाएगी।

    3. भारत की ग्रेफाइट आयात पर निर्भरता घटेगी।

    केतन आनंद, मेदिनीनगर (पलामू)। नक्सलवाद की छाया से मुक्त होकर अब पलामू विकास और समृद्धि की नई कहानी लिखने जा रहा है।

    इस भूमि से अब नक्सल नहीं बल्कि समृद्धता की फसल लहलहाने वाली है। यह खान एवं भूतत्व विभाग की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि पांकी अंचल के मौजा भांग परसिया क्षेत्र से क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट का अकूत खजाना मिला है।

    शुरूआती जांच में इसमें उच्च प्रतिशत के कार्बन मिलने की संभावना वयक्त की जा रही है, लेकिन विभाग की माने तो राजकीय भूतात्विक प्रयोगशाला से जांच रिर्पोट आने के बाद ही इस दावे पर मुहर लग सकती है।

    बता दें, कि भारत सरकार ने 2023 में अपनी अर्थव्यवस्था, रक्षा व स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों (ईवी, सोलर) के लिए जारी 30 महत्वपूर्ण खनिजों एक सूची में लिथियम, कोबाल्ट, निकल, तांबा, ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व, टाइटेनियम को प्रमुख रूप से शामिल किया है।

    केंद्र सरकार के गजट के अनुसार उक्त 30 खनिज उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक हैं। बता दे कि उक्त क्षेत्र में ग्रेफाइट खनिज की संभावना के बाद खान एवं भूतत्व निदेशालय ने पिछले वित्तीय वर्ष में अन्वेषण की स्वीकृति प्रदान की थी।

    इसके बाद सहायक निदेशक राकेश रौशन पन्ना के नेतृत्व में उक्त क्षेत्र के करीब एक वर्ग किलाेमीटर क्षेत्र के 8 केंद्रों को चिन्हित कर करीब 700 मीटर क्षेत्र में ड्रिल किया गया था। शुरूआती दिक्कतों के बाद टीम जैसे-जैसे गहराई तक ड्रिल होने लगे टीम के चेहरे पर मुस्कुराहट भी आने लगी।

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    सूचना मिलने के बाद उप निदेशक राजेंद्र उरांव ने भी फिल्ड का भ्रमण किया ओर इस खोज के लिए टीम का बधाई दी। अब विभागीय प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने के बाद ब्लाक बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    इसके बाद भारत सरकार स्तर से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे क्षेत्र के लोगों को बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उत्पन्न किए जा सकेंगे।

    सतबरवा के चांपी टू प्रोजेक्ट को मिली निदेशालय की हरी झंडी

    सतबरवा के चांपी क्षेत्र में उत्कृष्ट गुणवत्ता के ग्रेफाइट की खोज के बाद में अब भूतत्व निदेशालय ने चांपी टू प्रोजेट के अन्वेशन की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह पूरा क्षेत्र करीब 500 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

    mineral graphite

    उप निदेशक राजेंद्र उरांव।

    जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में प्राप्त ग्रेफाइट खनिज में कार्बन की मात्रा 7 से 24 प्रतिशत तक पाई गई है। जानकार बताते है कि इसे प्रसंस्करण कर 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है।

    देश के कई राज्यों में इसकी उपलब्धता के बावजूद भारतीय उद्योग चीन आयातित ग्रेफाइट पर आश्रित है। झारखंड के अलावा कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में भी ग्रेफाइट का भंडार है।

    माना जा रहा है कि पलामू में ग्रेफाइट का खनन कार्य शुरू हो जाने से अन्य देशों पर इसकी निर्भरता बहुत हद तक घटेगी। विशेषज्ञ बताते है कि विद्युत का सुचालक व ताप का कुचालक कार्य किए जाने से ग्रेफाइट खनिज की मांग कमोवेश हर क्षेत्र में है।

    इलेक्ट्रिक वाहन में लगने वाली लिथियम आर्यन बैट्री, स्मार्ट फोन और लैपटाप की बैट्री सहित अन्य उत्पादों में इसका उपयोग होता है।

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    सतबरवा के चांपी के बाद अब पांकी के भांग परसिया में उच्च कोटि के ग्रेफाइट का बड़ा निक्षेप मिला है। ड्रिलिंग से प्राप्त खनिज के नमूने को जांच के लिए हजारीबाग स्थित राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद निदेशालय स्तर से प्राप्त निर्देश के आलोक में अग्रतेर कार्रवाई की जाएगी।

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    राजेंद्र उरांव, उप निदेशक, खान एवं भूतत्व विभाग, पलामू अंचल