Hypothyroidism Treatment: योग और ध्यान से थायरॉयइड का इलाज! झारखंड में शुरू हुआ बड़ा क्लिनिकल ट्रायल
झारखंड के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हाइपोथायरायडिज्म के इलाज के लिए योग और ध्यान पर एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। ...और पढ़ें
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क्लीनिकल ट्रायल। फोटो जागरण

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सच्चिदानंद, मेदिनीनगर (पलामू)। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में इसके प्रभावी और समग्र प्रबंधन की दिशा में झारखंड में एक अहम पहल शुरू की गई है।
राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों (रिम्स छोड़कर) में चल रहे मल्टी-सेंट्रिक क्लिनिकल ट्रायल के तहत अब योग और ध्यान के प्रभाव की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। इस अध्ययन में पलामू का मेदिनीराय मेडिकल कालेज (एमएमसी) भी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।
इसी कड़ी में रविवार को चैनपुर के आदर्श नगर में 44 हाइपोथायरायड मरीजों के रक्त नमूने एकत्र किए गए। यह शोध फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज, दुमका के फिजियोलाजी विभाग द्वारा एमएमसी, पलामू के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि राजयोग आधारित योग और ध्यान पद्धति हाइपोथायरायडिज्म के प्रबंधन में कितनी प्रभावी साबित हो सकती है।
दवाओं को किया जा सकता है कम
एमएमसी के फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल प्रकाश ने बताया कि यह अध्ययन पारंपरिक योग-ध्यान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि यदि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं, तो यह मरीजों के लिए सहायक उपचार (एडजंक्ट थेरेपी) के रूप में एक उपयोगी विकल्प बन सकता है, जिससे दवाओं पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है।
ट्रायल के मुख्य अन्वेषक डॉ. पीयूष रंजन के अनुसार, अध्ययन का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। योग और ध्यान हस्तक्षेप के बाद प्रतिभागियों के रक्त नमूने लिए गए हैं, जिनके आधार पर शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तनों का विश्लेषण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अध्ययन का तीसरा चरण 31 मई को आयोजित किया जाएगा, जबकि पूरा ट्रायल एक वर्ष से अधिक समय तक चलेगा। इस दौरान मरीजों को नियमित रूप से योग और ध्यान सत्रों में शामिल किया जा रहा है।
इन सत्रों का संचालन ब्रह्माकुमारीज, चैनपुर की निर्देशिका बीके सिस्टर किरण द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शोध भविष्य में न केवल हाइपोथायरायडिज्म, बल्कि अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के उपचार के नए रास्ते भी खोल सकते हैं।