दवाएं बर्बाद, एंबुलेंस खड़ी रहीं और नया टेंडर! नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का स्वास्थ्य विभाग पर बड़ा हमला
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, जिसमें एंबुलेंस खरीद, दवाओं की बर्बादी और ऑक्स ...और पढ़ें

नेता प्रतिपक्ष ने कहा- स्वास्थ्य विभाग में कई गड़बड़ियां, कंसलटेंट को गलत ढंग से दिया गया अवधि विस्तार।
HighLights
स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस खरीद पर सवाल उठाए गए।
करोड़ों की जीवनरक्षक दवाएं गोदामों में एक्सपायर हुईं।
ऑक्सीजन टैंक परियोजना में 24 करोड़ का घोटाला सामने आया।
राज्य ब्यूरो, जागरण. रांची : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में घोटाला, दवा बर्बादी और एंबुलेंस खरीद पर सवाल उठाया है। उन्होंने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग में कारपोरेशन केवल लूट को अंजाम देने और टेंडर-ठेका मैनेज करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग की।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के कंसलटेंट को गलत ढंग से अवधि विस्तार दिया गया। उन्होंने कहा कि जून 2022 में 55.58 करोड़ की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का कोई उपयोगिता मूल्यांकन नहीं किया गया। सभी 206 एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक नामकोम में पड़ी रहीं। दूसरी तरफ, 237 नई एंबुलेंस की खरीद के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है। कैग रिपेार्ट में राज्य की एंबुलेंस व्यवस्था से संबंधित खरीद, उपयोग, तकनीकी मूल्यांकन एवं संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। कारपोरेशन के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर पाई गईं। कोविड काल में आक्सीजन टैंक परियोजना में लगभग 24 करोड़ का खेल सामने आया है। अयोग्य कंपनी को करोड़ों का ठेका दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने लगाए आरोप
- झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (JNHIDPCL) में कंसलटेंट को गलत तरीके से अवधि विस्तार दिया गया।
- जून 2022 में 55.58 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंस बिना किसी उपयोगिता मूल्यांकन के नामकोम में एक वर्ष से अधिक समय तक पड़ी रहीं। अब 237 नई एंबुलेंस की खरीद के लिए टेंडर निकाला गया है।
- CAG रिपोर्ट* में एंबुलेंस खरीद, उपयोग, तकनीकी मूल्यांकन और संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
- कारपोरेशन के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं।
- कोविड काल में ऑक्सीजन टैंक परियोजना में लगभग 24 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया, जिसमें अयोग्य कंपनी को ठेका दिया गया।
बाबूलाल मरांडी ने कहा, “स्वास्थ्य विभाग में कारपोरेशन केवल लूट और टेंडर-ठेका मैनेज करने के लिए बनाया गया है। यह घोटालों का अड्डा बन गया है। सरकार अगर सच्ची है तो इन सभी मामलों की सीबीआई जांच कराए।”