बॉल पेन ने खाेला 500 करोड़ का घोटाला: पटना की कंपनी ने झारखंड में 1962 के फर्जी दस्तावेजों से हड़पी 103 एकड़ वन भूमि
ईडी ने झारखंड हाई कोर्ट में बोकारो के तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री का खुलासा किया है। फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनी के माध्यम ...और पढ़ें

बोकारो वन भूमि घोटाला: ईडी ने किया 500 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा।
HighLights
ईडी ने 103 एकड़ वन भूमि घोटाले का खुलासा किया।
फर्जी दस्तावेजों से 500 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई।
शेल कंपनी बनाकर अवैध जमीन बिक्री की गई।
राज्य ब्यूरो, रांची। बोकारो के तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ जमीन को आपराधिक साजिश के तहत फर्जीवाड़ा कर बेचा गया था। इसके लिए फर्जी जमीन मालिक इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन ने शैलेश कुमार सिंह नामक व्यक्ति को पावर आफ अटार्नी दिया था।
शैलैश कुमार सिंह ने अपने बेटे व अन्य रिश्तेदार के नाम पर शेल कंपनी मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड बनाकर उस कंपनी के नाम पर जमीन की बिक्री की। उस शेल कंपनी के माध्यम से 20 अलग-अलग लोगों को रजिस्ट्री कर मोटी कमाई की।
इसके लिए मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड को पटना की राजबीर कंस्ट्रक्शन ने 3.40 करोड़ रुपये की फंडिंग भी की थी। इसका खुलासा झारखंड हाई कोर्ट में छह अप्रैल को ईडी के सहायक निदेशक करुण ने दाखिल शपथ पत्र में किया है।
झारखंड उच्च न्यायालय में शैलेश कुमार सिंह की याचिका पर ईडी ने यह शपथ पत्र दाखिल कर पूरे मामले की जानकारी दी है। इसके अलावा सीआइडी व वन विभाग ने भी शपथ पत्र में फर्जीवाड़े की जानकारी दी है। यानी, इस पूरे प्रकरण में तीन एजेंसियों ने अलग-अलग शपथ पत्र से फर्जीवाड़े की जानकारी कोर्ट को दी है।
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ईडी ने हाई कोर्ट को बताया है कि जमीन के कागजात में हेराफेरी कर आरोपितों ने करीब 500 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग की है। छानबीन में पता चला कि इजहार हुसैन व उसके दादा के नाम पर जमीन के फर्जी दस्तावेज बने थे।
तेतुलिया मौजा के थाना नंबर 38, खाता नंबर 59, प्लाट नंबर 426 व 450 का रिकार्ड संरंक्षित वन भूमि के नाम पर 09 जुलाई 1958 के बिहार गजट में है। आरोपितों ने वन विभाग से फर्जी एनओसी का उपयोग किया था।
ईडी ने इस पूरे प्रकरण में 10 मार्च 2025 को इंफार्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) नंबर आरएनजेडओ/02/2025 दर्ज किया था। सीआइडी ने भी सात अक्टूबर 2025 को अपने चार्जशीट नंबर 14/2025 में आवेदक शैलेश कुमार सिंह के अलावा इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन को आरोपित बनाया था।
1962 में बालपेन के इस्तेमाल दिखाया, जबकि उस वक्त चलता था डिप पेन व निब पेन
ईडी ने जांच में पकड़ा कि 1962 में जमाबंदी नंबर 70 में बाॅल पेन का उपयोग दर्शाया गया है। ऐतिहासिक व फोरेंसिक रिकार्ड के अनुसार सरकारी राजस्व रिकार्ड के लिए भारत में 1962 में बालपेन का उपयोग सरकारी कार्य में नहीं होता था।
राजस्व अधिकारी डिप पेन व निब पेन से कार्यालय के कार्य निपटाते थे। वर्ष 1962 में फर्जीवाड़ा कर जमीन की जमाबंदी हुई थी। उसमें अंग्रेजी के अंक का इस्तेमाल किया गया है, जबकि उस वक्त हिंदी के अंक का इस्तेमाल होता था।
14 दिनों के भीतर फर्जी तरीके से म्यूटेशन के दोषी मिले थे तत्कालीन सीओ
ईडी ने शपथ पत्र में बताया है कि विभागीय जांच में चास बोकारो के तत्कालीन अंचलाधिकारी निर्मल कुमार टोप्पो दोषी मिले। उन्होंने महज 14 दिन के भीतर ही फर्जी तरीके से म्यूटेशन के केस को निष्पादित कर दिया था। जांच के दौरान उनका पक्ष भी लिया गया था। उनके पक्ष से सरकार असंतुष्ट हुई और उन्हें चार मई 2018 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
शैलेश कुमार सिंह ने फर्जीवाड़े के 20 दिन पहले बनाई थी शेल कंपनी
ईडी ने शपथ पत्र में बताया है कि याचिका दाखिल करने वाले शैलेश कुमार सिंह ने उक्त जमीन का फर्जीवाड़ा करने के 20 दिन पहले एक लाख रुपये कैपिटल से शेल कंपनी मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड बनाई थी। यह कपंनी उसने अपने बेटे व कर्मचारी के नाम पर पर बनाई थी।
शैलेश कुमार सिंह ने फर्जी जमीन मालिक इजहार हुसैन व अख्तर हुसैन से पावर आफ अटार्नी लेकर विक्रेता के एजेंट के रूप में काम किया और 10 फरवरी 2021 को 74.38 एकड़ सरकारी भूमि को अपनी शेल कंपनी को बेच दिया। इसके लिए सेल डीड नंबर 719/2021 बना था।
सेल डीड नंबर 719/2021 में 10.30 करोड़ रुपये में जमीन बेचने की जानकारी दी गई है, जो बाजार मूल्य 23 करोड़ रुपये से आधे से कम है। इसके बावजूद मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड ने आइसीआइसीआई बैंक के चार चेक के माध्यम से केवल 38.85 लाख रुपये का ही भुगतान किया।
शैलेश कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को 16 फरवरी 2026 को कोर्ट ने अस्वीकृत कर दिया था। शेल कंपनी मेसर्स उमायुष मल्टीकाम प्राइवेट लिमिटेड को मेसर्स राजबीर कंस्ट्रक्शन ने अवैध तरीके से 3.40 करोड़ रुपये की फंडिंग की।
इसके लिए राजबीर कंस्ट्रक्शन पटना के पुनीत अग्रवाल ने आठ फरवरी 2021 को एक करोड़ 80 लाख रुपये व 10 फरवरी 2021 को एक करोड़ 20 लाख रुपये ट्रांसफर की थी।
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