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    झारखंड-बंगाल कोयला तस्करी: ₹10 के नोट से चलता था 'लाला' का सिंडिकेट, ED ने जब्त की ₹159 करोड़ की संपत्ति

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 03:33 PM (IST)

    ईडी ने ECL के लीज वाले इलाके में अवैध कोयला खनन मामले में मास्टरमाइंड अनूप मांझी उर्फ लाला के सिंडिकेट से जुड़ी 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की ...और पढ़ें

    अवैध कोयला खनन: ईडी ने लाला सिंडिकेट की 159.51 करोड़ की संपत्ति जब्त की।

    अवैध कोयला खनन: ईडी ने लाला सिंडिकेट की 159.51 करोड़ की संपत्ति जब्त की।

    HighLights

    1. ईडी ने लाला सिंडिकेट की 159.51 करोड़ संपत्ति जब्त की।

    2. अवैध कोयला खनन मामले में कुल 482.22 करोड़ की कुर्की।

    3. लाला पैड प्रणाली और हवाला नेटवर्क का उपयोग हुआ।

    राज्य ब्यूरो, रांची। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के लीज वाले इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन व चोरी में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने मास्टरमाइंड अनूप मांझी उर्फ लाला के सिंडिकेट से जुड़े आरोपितों की 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थाई रूप से जब्त की है।

    इस कुर्की के साथ ईडी ने इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल 482.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। ईडी ने जब्ती नोट में न्यायालय को बताया है कि एक सिंडिकेट के माध्यम से अवैध खनन किया जा रहा था, जिसका नेतृत्व अनूप मांझी उर्फ लाला कर रहा था।

    जांच में बंगाल के कुछ लाभार्थी कंपनियों को जान-बूझकर अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदते हुए पाया था। इन कंपनियों की मदद से अपराध से मिली रकम को छिपाने और उसे वैध दिखाने में मदद मिली। जब्त की गई संपत्ति में कारपोरेट बांड और वैकल्पिक निवेश फंड जैसी चल संपत्ति शामिल हैं। ये चल संपत्ति लाभार्थी संस्थाओं के नाम पर रखे गए थे।

    इनमें श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड व श्याम फेरो अलायज लिमिटेड शामिल हैं, जो श्याम समूह का हिस्सा है और उनका प्रबंधन तथा नियंत्रण संजय अग्रवाल व बृजभूषण अग्रवाल के हाथों में है।

    लाला पैड नामक अवैध परिवहन चालान प्रणाली का होता था उपयोग

    ईडी की जांच में यह जानकारी मिली है कि लाला सिंडिकेट की उपरोक्त कंपनियां अवैध खनन व बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में लिप्त थीं और स्थानीय प्रशासनिक तत्वों की मदद से कोयले को बंगाल की कई फैक्ट्रियाें में बांटती थी।

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    इस कार्य में लाला पैड नामक एक अवैध परिवहन चालान प्रणाली का उपयोग होता था जो फर्जी संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए नकली टैक्स इंवायस के रूप में काम करता था। नकली परिवहन चालान के साथ ट्रांसपोर्टर को दस रुपये या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था।

    ट्रांसपोर्टर अवैध कोयला ले जा रहे ट्रक, डंपर या टिपर की नंबर प्लेट के पास उस नोट को पकड़कर उसकी एक तस्वीर लेता था और उस तस्वीर को कोयला सिंडिकेट के आपरेटर को भेज देता था।

    इसके बाद आपरेटर उस तस्वीर को वाट्सएप के जरिये वाहन के रास्ते में पड़ने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों व अन्य सरकारी अधिकारियों को भेज देता था, जिससे यह सुनिश्चित होता था कि ट्रक को रोका न जाय। अगर रोका भी जाए तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए।

    अपराध से मिली रकम को नकद में ट्रांसफर करने के लिए हवाला नेटवर्क 

    ईडी की जांच में पता चला है कि अपराध से मिली रकम को नकद में ट्रांसफर करने के लिए एक हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे औपचारिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार कर दिया गया था। नोट के सीरियल नंबर भेजने वाले व पाने वाले के बीच साझा होता था।

    यह लेन-देन का माध्यम था। मिलते-जुलते नोट के सत्यापन के बाद बिना किसी औपचारिक दस्तावेज के ही नकद राशि सौंप दी गई, जिससे धनराशि का निर्बाध और अचिह्नित हस्तांतरण संभव हो सका।

    इस अपराध में कई स्तरों पर जटिल वित्तीय लेन-देन शामिल हैं, जिन्हें अवैध धन के स्रोत व स्वामित्व को छिपाने के लिए किया गया था।ईडी इन स्तरों को खंगाल रही है, ताकि अंतिम लाभार्थियों की पहचान की जा सके।

    अपराध से अर्जित अतिरिक्त धन का पता लगाया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि मनी लांड्रिंग की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल हैं। बंगाल, झारखंड से यूपी तक लाला का नेटवर्क फैला हुआ है।

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