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    LPG संकट के बीच याद आई गोबरधन योजना, गढ़वा में अधिकारियों की उदासीनता से नहीं शुरू हो पाई गैस की सप्लाई

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 04:09 PM (IST)

    गढ़वा जिले में 50 लाख की लागत से बने दो गोबरगैस प्लांट अधिकारियों की उदासीनता और गलत नियोजन के कारण ठप पड़े हैं। वैश्विक एलपीजी संकट के बीच यह योजना ल ...और पढ़ें

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    संवाद सहयोगी, गढ़वा। अमेरिका इजराइल व ईरान युद्ध के दौरान पूरा विश्व एलपीजी संकट झेल रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा शुरू की गई गोबरधन योजना लोगों के लिए वरदान साबित होती।

    संकट के समय में यह योजना लोगों के लिए काम आती तथा खाना बनाने एवं रोशनी के लिए इस योजना का लाभ लोगों को मिलता, मगर पदाधिकारियों एवं कर्मियों में दूरदर्शिता की कमी के कारण यह योजना ठप पड़ी हुई है।

    गढ़वा जिले में भी योजना के तहत दो गोबरगैस प्लांट का निर्माण कराया गया था। मगर वह हाथी का दांत साबित हो रहा है। उक्त प्लांट का निर्माण पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा गढ़वा जिले में 50 लाख रुपये की लागत से किया गया था। मगर इसका लाभ लोगों को नहीं मिल सका।

    इन दोनों प्लांट से 24 घरों को कनेक्शन भी दिया गया है । इसका उद्देश्य घरों में बायोगैस से खाना बनाना, बल्ब जलाना तथा गोबर का उपयोग खाद के रूप में करना है।

    इस योजना के तहत संबंधित घरों तक पाइप के माध्यम से कनेक्शन पहुंचाते हुए खाना बनाने के लिए चूल्हा भी वितरित किया गया है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा है।

    ग्रामीणों कहना है कि प्लांट का निर्माण सही जगह पर नहीं किया गया है। घर से दूर होने की वजह से वे प्लांट में गोबर डालने नहीं जा पाते हैं। इसके अलावा जिनके घरों में गाय नहीं है, उन्हें भी कनेक्शन दे दिया गया है। इस तरह प्लांट में गोबर नहीं डाले जाने से ठप है।

    गढ़वा जिले में 25-25 लाख रुपये की लागत से 30-30 घन मीटर वाले दो गोबरगैस प्लांट का निर्माण कराया गया है। इसमें एक प्लांट गढ़वा शहर से सटे जाटा गांव में राजेश्वर प्रजापति की जमीन पर है, जबकि दूसरा प्लांट बिशुनपुरा प्रखंड के पिपरी खुर्द गांव में जय सिंह के घर के पास है।

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    फिलहाल ये दोनों प्लांट बंद हैं। इस प्लांट के साथ एक हैंडपंप भी लगाया गया है, ताकि गोबर को पानी के साथ मिक्स करने में लोगों को पानी के लिए भटकना न पड़े।

    क्या कहते हैं ग्रामीण?

    जाटा निवासी राजेश्वर प्रजापति ने बताया कि प्लांट तो बना दिया गया है मगर इसके लिए गोबर ही नहीं मिल रहा है। ठेकेदार ने कहा था कि गोबर की व्यवस्था कराएंगे मगर वह भी नहीं करा पाए, जिसके कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    प्लांट बनाने के लिए मैंने जमीन भी उपलब्ध कराया है मगर वह भी बेकार हो गया है। ठेकेदार द्वारा कुछ राशि भी देने की बात कही गई थी मगर वह भी नहीं दिया जा रहा है।

    क्या है योजना का मकसद?

    गोबरधन यानी गैल्वनाइजिंग आर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज योजना का मकसद गांवों को साफ रखना है। ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाना, मवेशियों के कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद बनाना है।

    जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा अप्रैल 2018 में गोबर-धन योजना शुरू की गई थी। इससे घरों में बिजली जलाने एवं खाना बनाने की भी व्यवस्था करना शामिल था। पाइपलाइन के माध्यम से गैस लोगों के घरों में पहुंचाया जाता है।

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