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    'प्रक्रिया जारी' बहाना नहीं चलेगा, लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई तो JH हाई कोर्ट पारित करेगा परमादेश

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 11:23 AM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने लोकायुक्त और सूचना आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों के चार साल से अधिक समय से खाली रहने पर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने ...और पढ़ें

    'प्रक्रिया जारी है' बहाने पर हाई कोर्ट असंतुष्ट। (तस्वीर: फाइल)

    'प्रक्रिया जारी है' बहाने पर हाई कोर्ट असंतुष्ट। (तस्वीर: फाइल)

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने रिक्त संवैधानिक पदों पर नाराजगी जताई।

    2. कहा- चार साल से सभी पद निष्क्रिय बनाना उचित नहीं।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में लोकायुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से फिर से समय दिए जाने की गुहार लगाने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार का रवैया ठीक नहीं है।

    पूर्व में कई बार अदालत ने सरकार को नियुक्ति करने का निर्देश दिया और पिछली सुनवाई में महाधिवक्ता ने नियुक्ति प्रक्रिया छह सप्ताह में पूरी करने की अंडर टेकिंग भी दिया था। उसके बाद फिर से समय मांगा जाना गंभीर मामला है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार संवैधानिक प्राधिकारों के पदों पर नियुक्ति करने की नीयत नहीं रखती है।

    अदालत ने मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित करते हुए कहा है कि इस बीच सरकार इन पदों पर नियुक्ति के लिए ठोस कार्रवाई करते हुए शपथ पत्र अदालत में प्रस्तुत करे, नहीं तो अदालत इन पदों पर नियुक्ति को लेकर परमादेश (मेंडमस) जारी करेगी।

    कोर्ट ने कहा कि मामले में कड़ा आदेश पारित करना नहीं चाहते हैं, लेकिन सरकार लंबे समय से इस मामले को टाल रही है, जिससे अदालत को सख्त आदेश पास करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

    पिछले चार साल से सरकार ने इन पदों को निष्क्रिय बना कर रखा है और सरकार हर बार कोई परेशानी बता मामले को टाल रही है। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि लोकायुक्त समेत अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है।

    लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए बैठक शीघ्र बुलाई जाएगी। लेकिन अपरिहार्य कारणों से पूर्व में निर्धारित बैठक टाल दी गई है। इस पर अदालत ने मौखिक कहा कि अगर आपकी बातों और राय को सरकार सुनती नहीं है तो न्यायालय में उनको बचाने का आग्रह क्यों कर रहे हैं।

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    क्योंकि पूर्व में आपकी ओर से ही अदालत को आश्वस्त किया गया था कि छह सप्ताह के अंदर ही लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी जाएगी। छह सप्ताह की तिथि 23 मार्च को समाप्त हो रही है। इसलिए उस दिन सरकार इस मामले में ठोस कार्रवाई करे।

    प्रार्थी राजकुमार की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि सरकार अब तक इस मामले में 50 से अधिक बार समय ले चुकी है, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

    हर बार सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जाती है, लेकिन वर्ष 2020 से अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था।

    साथ ही मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन, महिला आयोग सहित अन्य पदों पर नियुक्ति कब तक होगी, इस पर सरकार से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब भी मांगा गया था।

    बता दें कि इसको लेकर हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन और राजकुमार सहित अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसमें रिक्त पड़े संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की मांग की गई है।

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