शराब भर रही है खजाना: 4500 करोड़ का नया राजस्व लक्ष्य, 26 दुकानें सरकार खुद चलाएगी; झारखंड में महंगी होगी शराब?
झारखंड उत्पाद विभाग ने 2026-27 के लिए 4250 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य प्रस्तावित किया है, जिसे वित्त विभाग 4500 करोड़ से अधिक करने पर विचार कर रहा ह ...और पढ़ें

झारखंड में शराब राजस्व लक्ष्य 4500 करोड़ पार करने की तैयारी। (फोटो: सांकेतिक)
HighLights
राजस्व लक्ष्य 4250 करोड़ से बढ़कर 4500 करोड़ होगा।
झारखंड में खुदरा शराब दुकानदारों पर दबाव बढ़ेगा।
26 सरेंडर दुकानों का संचालन JSBCL कर सकता है।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व लक्ष्य को इस बार और ऊंचा करने की तैयारी चल रही है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4250 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य प्रस्तावित किया है, लेकिन वित्त विभाग में इसे बढ़ाकर 4500 करोड़ रुपये से अधिक करने पर विचार जारी है।
यदि ऐसा होता है तो खुदरा शराब दुकानदारों पर राजस्व हासिल करने का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। अमूमन हर साल राजस्व लक्ष्य में लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रविधान रहा है, लेकिन इस बार इससे अधिक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि दुकानदारों पर दबाव से अधिकारी इनकार कर रहे हैं।
ऐसे में पहले से ही दबाव झेल रहे दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। राज्य में फिलहाल 1343 खुदरा शराब दुकानें संचालित हैं। लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि आठ जिलों में 26 दुकानों को अपेक्षित राजस्व नहीं मिलने के कारण दुकानदारों ने सरेंडर कर दिया है।
अब इन दुकानों की नई बंदोबस्ती की प्रक्रिया चल रही है। विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही इनका संचालन फिर शुरू हो जाएगा। यदि प्राइवेट दुकानदार रुचि नहीं दिखाते हैं तो इनका संचालन झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के माध्यम से किया जाएगा।
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उत्पाद विभाग का रिकॉर्ड, 4013.53 करोड़ का राजस्व जुटाया
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4013.53 करोड़ रुपये का रिकार्ड राजस्व हासिल किया है। यह पिछले आंकड़े 2700 करोड़ रुपये से बहुत आगे है और नया कीर्तिमान है। विभाग ने अधिकृत बयान जारी कर इसकी जानकारी साझा की।
लाइसेंसिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों के कारण यह ऐतिहासिक वृद्धि संभव हो सकी है। इस अभूतपूर्व राजस्व वृद्धि के पीछे कई अहम कारण रहे हैं। विभाग ने डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया, जिससे शराब की आपूर्ति और बिक्री पर निगरानी अधिक प्रभावी हुई।
अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए, जिससे राजस्व में रिसाव पर रोक लगी। इसके अलावा, नई उत्पाद नीति के तहत लाइसेंस शुल्क और उत्पाद शुल्क में किए गए संशोधनों ने भी राजस्व संग्रह में अहम भूमिका निभाई। राज्य में शराब दुकानों के संचालन में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भी आय में इजाफा हुआ है।
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