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    झारखंड राज्यसभा चुनाव: JMM के सामने झुकेगी कांग्रेस? टिकट के लिए इन दो चेहरों पर फंसा पेंच

    Updated: Wed, 27 May 2026 02:44 PM (IST)

    झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें कांग्रेस एक सीट पर दावेदारी कर रही है। कांग्रेस को झामुमो का समर्थन चाहिए, जिसके लिए उसे एक ...और पढ़ें

    झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारी, झामुमो के समर्थन पर टिकी उम्मीद।

    झारखंड राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की एक सीट पर दावेदारी, झामुमो के समर्थन पर टिकी उम्मीद।

    HighLights

    1. कांग्रेस राज्यसभा की एक सीट पर दावेदारी कर रही है।

    2. झामुमो का समर्थन कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है।

    3. सुबोधकांत सहाय और राजेश ठाकुर संभावित उम्मीदवार।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की राजनीति में अगले कुछ दिनों तक राज्यसभा चुनाव को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच शह-मात का खेल जारी रहेगा। राज्यसभा में दो सीटें खाली हुई हैं और इन दो सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और भाजपा भी अपने-अपने स्तर से दावेदारी कर रही है।

    ऐसे में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है वह इस बात पर निर्भर है कि किसके पास कौन सा चेहरा है। कांग्रेस भी इसी उलझन में है। झामुमो को दोनों सीट पर जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस का समर्थन चाहिए तो कांग्रेस का भी झामुमो के बगैर काम नहीं चलेगा।

    इस परिस्थिति में कांग्रेस को चेहरा तय कर आगे बढ़ना होगा। पार्टी ने अभी तक कोई चेहरा तय नहीं किया हे। विभिन्न स्तरों पर पार्टी के पदाधिकारी चेहरा तय करने में जुटे हुए हैं। अंतिम दो नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के नाम पर कम से कम आपत्ति होने की बात कही जा रही है।

    झामुमो की ओर से इन दोनों नामों में से किसी एक पर सहमति मिल सकती है। दोनों नेता मौके की नजाकत को देखते हुए फिलहाल नई दिल्ली में कैंप कर रहे हैं ताकि उम्मीदवारी सुनिश्चित की जा सके। दोनों की नियमित तौर पर मुलाकात पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ भी होगी।

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    इन्हीं मुलाकातों के बीच टिकट का प्रबंध भी होगा। माना जा रहा है कि कांग्रेस कोई ऐसा चेहरा नहीं लाएगी जिसपर झामुमो को आपत्ति हो और जिन्हें वोट देने के लिए पार्टी के विधायक ही तैयार ना हों। इस बार चुनाव में भाजपा की दावेदारी भी हो रहीे है।

    ऐसे में विधायकों के बीच किसी खेल से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। तमाम परिस्थितियों में कुल मिलाकर कांग्रेस को एक सीट मिलना उतना आसान नहीं है जितना होना चाहिए।

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