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    JPSC Scam: उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने खोले TDPL के राज, बिना टेंडर काम और आंसर-की लीक

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 08:52 AM (IST)

    जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने सीआईडी को बताया कि टीडीपीएल को बिना ...और पढ़ें

    परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का सीआईडी के समक्ष खुलासा, नामिनेशन के आधार पर मिली थी संवेदनशील जिम्मेदारी।

    परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का सीआईडी के समक्ष खुलासा, नामिनेशन के आधार पर मिली थी संवेदनशील जिम्मेदारी।

    HighLights

    1. टीडीपीएल को बिना निविदा के परीक्षा संचालन का काम मिला।

    2. एजेंसी के परिसर से परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का डेटा मिला।

    3. परिणाम से करीब एक माह पहले 14वीं जेपीएससी पीटी की आंसर-की भेजी गई।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं।

    सीआईडी की पूछताछ में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने एजेंसी के चयन से लेकर परीक्षा संचालन तक की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके बयान के अनुसार, जेपीएससी ने टीडीपीएल को बिना किसी निविदा के केवल नामिनेशन के आधार पर परीक्षा से जुड़ा काम सौंप दिया था।

    जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि जेपीएससी जैसी संवेदनशील संस्था में परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया किसी एक निजी एजेंसी को देने के बावजूद उसके काम की निगरानी और सत्यापन के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं बनाया गया। सीआईडी अब इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों, एजेंसी के कर्मियों और परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

    शुरुआत से परिणाम तक की प्रक्रिया टीडीपीएल के हवाले

    पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने सीआईडी को बताया है कि टीडीपीएल को परीक्षा संचालन से संबंधित प्रारंभिक प्रक्रिया से लेकर अंतिम प्रक्रिया तक का काम सौंपा गया था। यह जिम्मेदारी निविदा प्रक्रिया के बजाय नामिनेशन के आधार पर दिए जाने की बात सामने आई है।

    जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किस आधार पर टीडीपीएल का चयन किया गया और उसे इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

    परीक्षा के प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिकाओं, उत्तर कुंजी और परिणाम तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं में गोपनीयता सबसे अहम होती है। ऐसे में किसी बाहरी एजेंसी को पूरी प्रक्रिया सौंपे जाने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    एजेंसी के काम पर निगरानी का सवाल

    जांच में यह बिंदु भी सामने आया है कि जब परीक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं एक ही एजेंसी के जिम्मे थीं, तब उसकी गतिविधियों की स्वतंत्र निगरानी किस स्तर पर होती थी। सीआईडी यह भी देख रही है कि संवेदनशील दस्तावेजों की आवाजाही, डिजिटल डाटा की सुरक्षा और उत्तर पुस्तिकाओं के संरक्षण के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।

    टीडीपीएल के आवासीय परिसर में मिले चार कंप्यूटर

    सीआईडी की जांच में सामने आया एक और तथ्य मामले को और गंभीर बना रहा है। टीडीपीएल के लालपुर स्थित वर्धमान कंपाउंड के आवासीय परिसर की छानबीन के दौरान जांच टीम को चार कंप्यूटर मिले। इन कंप्यूटरों की जांच में फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मेंस-2026 परीक्षा के परीक्षार्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित डाटा मिलने की बात सामने आई है।

    जांच के दौरान टीडीपीएल के कर्मी प्रदीप कुमार सिंह से भी पूछताछ की गई। बताया जाता है कि उन्होंने सीआईडी को जानकारी दी कि उक्त कंप्यूटर कंपनी के स्टाफ उस्मान और मो. एबाद वहां लेकर आए थे।

    इसके बाद सीआईडी ने श्वेता गुप्ता से भी इस संबंध में पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने बताया कि परीक्षा से संबंधित किसी भी संवेदनशील दस्तावेज को आयोग के निर्धारित परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है।

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    ऐसे में टीडीपीएल के कर्मियों द्वारा परीक्षा से जुड़े दस्तावेज या डाटा आवासीय परिसर में रखे जाने को लेकर जांच एजेंसी ने गंभीरता से पड़ताल शुरू कर दी है।

    रिजल्ट से करीब एक माह पहले भेजी गई आंसर-की

    सीआईडी की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी श्वेता गुप्ता के मोबाइल फोन की जांच से सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के अनुसार 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) 19 अप्रैल को आयोजित हुई थी और इसका परिणाम दो जुलाई को जारी किया गया था।

    लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि श्वेता गुप्ता ने 26 मई को टीडीपीएल के कर्मी मो. उस्मान के वाट्सएप पर 14वीं जेपीएससी पीटी की आंसर की भेजी थी। यानी परीक्षा परिणाम जारी होने से करीब एक महीने पहले ही आंसर की भेजे जाने का दावा जांच में सामने आया है।

    सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आंसर की किस स्तर पर तैयार हुई, उसे किस उद्देश्य से भेजा गया और इसके बाद उसका इस्तेमाल किस तरह हुआ। मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों, वाट्सएप चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डाटा की भी जांच की जा रही है।

    जांच के केंद्र में कई अहम सवाल

    • टीडीपीएल को बिना निविदा नामिनेशन के आधार पर काम क्यों दिया गया?
    • परीक्षा की पूरी प्रक्रिया एक ही एजेंसी के हवाले करने का निर्णय किसने लिया?
    • संवेदनशील दस्तावेज एजेंसी के आवासीय परिसर तक कैसे पहुंचे?
    • चार कंप्यूटरों में परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का डाटा क्यों मौजूद था?
    • 14वीं जेपीएससी पीटी की आंसर की रिजल्ट से करीब एक माह पहले मो. उस्मान को क्यों भेजी गई?
    • परीक्षा संचालन में गोपनीयता और चेक एंड बैलेंस की व्यवस्था कहां और कैसे विफल हुई?

    इन सभी बिंदुओं पर सीआईडी की जांच आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी अब उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

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