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    सावधान! दिल्ली वालों की त्वचा हो रही समय से पहले बूढ़ी, प्रदूषण और खारे पानी का पड़ रहा है सीधा असर

    Updated: Thu, 18 Jun 2026 07:54 AM (IST)

    दिल्ली में प्रदूषण और खारे पानी के कारण लोगों की त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो रही है, जो राष्ट्रीय औसत से 18% अधिक है। ...और पढ़ें

    दिल्ली वालों के त्वचा की कसावट को कम कर रहा प्रदूषण (Image Source: AI-Generated)

    दिल्ली वालों के त्वचा की कसावट को कम कर रहा प्रदूषण (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. दिल्ली में प्रदूषण, खारे पाने से त्वचा समय से पहले बूढ़ी

    2. राष्ट्रीय औसत से 18% अधिक त्वचा की कसावट में कमी

    3. पुरुषों में महिलाओं की तुलना में तेजी से उम्र बढ़ने की प्रवृत्ति

    प्रेट्र, नई दिल्ली। दिल्ली के लोगों में त्वचा की कसावट में सबसे अधिक कमी देखी गई है, जिसमें प्रदूषण, कठोर जल और यूवी किरणों के प्रति लंबे समय तक संपर्क प्रमुख कारक के रूप में उभरे हैं। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग 18 प्रतिशत ज्यादा है। इससे त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो रही है।

    यह अध्ययन जो निंगेन स्किन साइंसेज द्वारा आरिगा रिसर्च के सहयोग से किया गया है। इसे देश के सबसे बड़े एआई आधारित त्वचा अध्ययन में से एक माना जा रहा है। इस अध्ययन में देश भर में 725 शहरों में 21,373 लोगों का विश्लेषण किया, ताकि त्वचा के पैटर्न को समझा जा सके।

    शोधकर्ताओं ने स्किनसेंसएआइ प्लेटफार्म के माध्यम से एआई संचालित चेहरे के स्कैन का उपयोग कर झुर्रियों, काले घेरे, कसावट, लचीलापन, निर्जलीकरण व रंगद्रव्य सहित 12 त्वचा के स्वास्थ्य मानकों का मूल्यांकन किया। राजधानी में दिल्ली ने भारत में त्वचा की कसावट का स्कोर 4.11 (5 में से) दर्ज किया, जबकि कोलकाता का स्कोर 3.49 और राष्ट्रीय औसत 3.62 था।

    Premature aging

    (Image Source: AI-Generated) 

    तेजी से उम्र बढ़ने लगी

    शोधकर्ताओं ने कहा कि दिल्ली के निवासियों में कोलकाता के मुकाबले लगभग 18 प्रतिशत अधिक कसावट की कमी की गंभीरता देखी गई। यह सुझाव देता है कि पर्यावरणीय कारक राजधानी में त्वचा की तेजी से उम्र बढ़ने में योगदान कर सकते हैं। दिल्ली में त्वचा के लचीलेपन में कमी का स्कोर 5 में से 3.99 और काले घेरे की गंभीरता का स्कोर 5 में से 3.80 दर्ज किया गया। इस प्रवृत्ति के लिए पर्यावरण को जिम्मेदार बताया गया है, जिसमें ज्यादा प्रदूषण, खारा पानी और यूवी किरणों का असर शामिल है।

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    खराब त्वचा के लिए पर्यावरण को जिम्मेदार

    राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक अक्सर 200 से 400 के बीच रहता है, जबकि कई क्षेत्रों में जल में कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) स्तर 300 से 500 के बीच रिकार्ड किया गया है। ये ऐसे कारक हैं जो कोलेजन को नुकसान पहुंचा सकते हैं और त्वचा के लचीलेपन को कम कर सकते हैं। दिल्ली में त्वचा के लचीलेपन में कमी का स्कोर 5 में से 3.99 और काले घेरे का स्कोर 5 में से 3.80 दर्ज किया गया। इसमें ज्यादा प्रदूषण, खारा पानी और यूवी किरणों का असर शामिल है।

    79 प्रतिशत भारतीय त्वचा से जुड़ी समस्या से जूझ रहे

    शोधकर्ताओं ने कहा कि ये निष्कर्ष विशिष्ट स्किनकेयर दृष्टिकोण को उजागर करते हैं और दिल्ली के लिए एंटी पाल्यूशन स्किनकेयर समाधानों को प्रमुख आवश्यकता के रूप में पहचाना गया है। ये निष्कर्ष 2023 से 2025 के बीच एआई संचालित चेहरे के विश्लेषण का उपयोग करके किया गया। यह शोध क्यूरियस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर 79 प्रतिशत भारतीय त्वचा से जुड़ी कम से कम एक समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लोग डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से परेशान हैं।

    पुरुषों में 22 प्रतिशत तेजी से उम्र बढ़ने की प्रवृत्ति

    काले घेरे की समस्या व्यापक चिंताओं में से एक के रूप में उभरी, जो 66.6 प्रतिशत प्रतिभागियों को प्रभावित करती हैं, जिसमें आनुवंशिकी, रंगद्रव्य और जीवनशैली के कारक नींद की कमी की तुलना में भूमिका निभाते हैं। पुरुषों में महिलाओं की तुलना में 22 प्रतिशत तेजी से उम्र बढ़ने की प्रवृत्ति पाई गई। 23.5% अधिक यूवी स्पाट दर्ज किए, जो अध्ययन में सबसे बड़ा लैगिंक अंतर था। उन्होंने कसावट, लोच, झुर्रियों और यूवी संबंधित रंगद्रव्य में खराब स्कोर दर्ज किए। सुझाव दिया कि आनुवंशिकी त्वचा स्वास्थ्य के परिणामों का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा बनाती है, शेष 55 प्रतिशत ऐसे परिवर्तनीय कारकों से प्रभावित होता है जैसे जीवनशैली व स्किनकेयर दिनचर्या।

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