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    1825 की तंजोर पेंटिंग से प्रेरित है रश्मिका मंदाना की साड़ी, 4 हजार घंटों में तैयार हुआ यह खास डिजाइन

    Updated: Sat, 14 Mar 2026 03:04 PM (IST)

    रश्मिका मंदाना की साड़ी तंजोर पेंटिंग से प्रेरित है, जिसे बनाने में 4000 घंटे का समय लगा। ...और पढ़ें

    क्यों खास है रश्मिका मंदाना की साड़ी? (Picture Courtesy: Instagram)

    क्यों खास है रश्मिका मंदाना की साड़ी? (Picture Courtesy: Instagram)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अभिनेत्री रशमिका मंदाना अक्सर अपने स्टाइल और सादगी के लिए जानी जाती है। हाल ही में, एक्टर विजय देवरकोंडा के साथ वे शादी के बंधन में बंधी और उनकी वेडिंग फोटोज सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जा रही हैं। 

    शादी के बाद उन्होंने अपनी मेहंदी सेरेमनी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसमें दर्शकों का सबसे ज्यादा ध्यान उनकी साड़ी ने खींचा। रश्मिका की यह साड़ी सिर्फ स्टाइलिश ही नहीं थी, बल्कि कला का भी अद्भुत नमूना थी। आइए जानें इस साड़ी की खासियत क्या थी।

    1825 की कला और मॉडर्न डिजाइन का संगम

    इस साड़ी को मशहूर डिजाइनर करण तोरानी ने डिजाइन किया है। इस साड़ी की डिजाइन का मुख्य आकर्षण इस पर बनी देवी लक्ष्मी की पेंटिंग है। दरअसल, यह कलाकृति साल 1825 की मशहूर तंजौर पेंटिंग से प्रेरित है। साड़ी की पूरी ओढ़नी पर एक विशाल मंदिर का मेहराब बनाया गया है, जिसके भीतर धन की देवी लक्ष्मी की सुंदर छवि उकेरी गई है। डिजाइनर की कल्पना इसे एक चलते-फिरते मंदिर के रूप में पेश करने की थी।

    Tanjore Lakshmi Painting

    (Picture Courtesy: Instagram)

    4,000 घंटों का कठिन परिश्रम

    एक साड़ी को बनाने में समय और धैर्य की जरूरत होती है, और यह साड़ी इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। इस साड़ी को तैयार करने में कारीगरों को लगभग 4,000 घंटे का समय लगा। रश्मिका की सुंदरता और सादगी को ध्यान में रखते हुए, इस साड़ी के हर धागे को बहुत ही बारीकी से बुना गया है। करण तोरानी का मानना है कि रश्मिका का स्टारडम नहीं, बल्कि उनकी सिंपलिसिटी उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है, और यही सादगी इस साड़ी के डिजाइन में भी झलकती है।

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    भारतीय परंपरा से जुड़ाव

    इस साड़ी के पीछे की सोच भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ी है। हिंदू परंपरा में माना जाता है कि जब घर में नई बहू का आगमन होता है, तो वह साक्षात देवी लक्ष्मी का प्रवेश होता है। बहू का आना घर में शांति, समृद्धि और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। रश्मिका के इस पहनावे का भावनात्मक आधार भी यही पवित्र भावना है। 

    Rashmika Saree

    (Picture Courtesy: Instagram)

    रत्नों और हीरों से सजी भव्यता

    इस शाही पहनावे को और भी खास बनाने के लिए इसे कीमती गहनों के साथ पेयर किया गया है। रश्मिका ने इसके साथ बर्मीज रत्नों से जड़ा एक लंबा रोज कट डायमंड नेकलेस पहना है। साड़ी की पारंपरिक पेंटिंग और आधुनिक हीरों के हार का यह मेल रश्मिका को एक दिव्य और राजसी लुक दे रहा है।