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    जींस के साथ झुमके और कांच की चूड़ियां, युवाओं के बीच क्यों हिट हो रहा है देसी Maximalism

    Updated: Tue, 24 Feb 2026 05:25 PM (IST)

    सोशल मीडिया पर अब देसी एस्थेटिक्स और फैशन का ट्रेंड है, जो वेस्टर्न मिनिमलिज्म की जगह ले रहा है। ...और पढ़ें

    क्यों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है देसी फैशन? (AI Generated Image)

    क्यों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है देसी फैशन? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कुछ समय पहले तक सोशल मीडिया खोलते ही हर तरफ सिर्फ पेस्टल कलर्स, सादे कपड़े और नो-मेकअप लुक ही नजर आता था। ऐसा लगता था जैसे मिनिमलिज्म ही फैशन का इकलौता नियम बन गया है, लेकिन अब हवा का रुख पूरी तरह बदल चुका है। 

    न्यूट्रल रंगों की उस बोरियत को तोड़ते हुए अब खनखनाती चूड़ियां, लाल सुर्ख आल्ता, मोगरे का गजरा और भारी विंटेज जूलरी की शानदार वापसी हुई है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों आज की मॉडर्न पीढ़ी 'लेस इज मोर' को पीछे छोड़कर बेबाक, रंग-बिरंगे और वाइब्रेंट 'देसी मैक्सिमलिज्म' (Desi Core) को अपना रही है।

    क्या है यह ट्रेंड?

    मैक्सिमलिज्म का मतलब सिर्फ ज्यादा सामान नहीं है। इसमें खुद को एक्सप्रेस भी खुलकर किया जाता है। इसमें वाइब्रेंट कलर, भारी कढ़ाई वाले कपड़े, ढेर सारी चूड़ियां और माथे पर बिंदी सब कुछ एक साथ नजर आता है। सोशल मीडिया पर अब क्लीन गर्ल एस्थेटिक की जगह देसी कोर और विंटेज रोमांस जैसे ट्रेंड्स ने ले ली है।

    Desi Aesthetics

    (Picture Courtesy: Instagram)

    क्यों हो रही है देसी श्रृंगार की वापसी?

    • पहचान की तलाश- ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सब कुछ एक जैसा दिखने लगा था। युवाओं को अब अहसास हो रहा है कि वेस्टर्न मिनिमलिज्म अपनाने के चक्कर में वे अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं। चूड़ियां खनकाना, पैरों में आल्ता लगाना और बालों में मोगरे का गजरा सजाना केवल फैशन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति से जुड़ने का एक तरीका बन गया है।
    • सोशल मीडिया और विजुअल अपील- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वही कंटेंट सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है जो विजुअली रिच होता है। एक सादे सफेद कुर्ते के मुकाबले, रंगीन दुपट्टा, झुमके और गहरे रंग का आल्ता कैमरे पर ज्यादा अट्रैक्टिव और एस्थेटिक लगता है। कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का एक नया कैनवास है।
    • पुरानी यादों का आकर्षण- आज की पीढ़ी अपनी दादी-नानी की पुरानी तस्वीरों से प्रेरित हो रही है। वह दौर जब श्रृंगार एक रस्म हुआ करती थी, आज के फास्ट फैशन के जमाने में बहुत सुकून देने वाला लगता है। गजरे की खुशबू और चूड़ियों की आवाज में एक ऐसी ओल्ड वर्ल्ड चार्म है, जो मिनिमलिज्म कभी नहीं दे पाया।
    • डिजिटल थकान- हर तरफ एक जैसी दिखने वाली सलीकेदार और परफेक्ट चीजों से लोग ऊब चुके हैं। मैक्सिमलिज्म थोड़ा मेसी, लेकिन वाइब्रेंट होता है। यह इंसान के खुशमिजाज और बिंदास स्वभाव को दिखाता है, जो किसी नियम में बंधकर नहीं रहना चाहता।
    • परंपरा का मेल- दिलचस्प बात यह है कि लोग अब इसे पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि एक फ्यूजन के तौर पर अपना रहे हैं। जींस के साथ चांदी के भारी कड़े पहनना या को-ऑर्ड सेट्स के साथ आल्ता लगाना अब यह नया फैशन बन गया है। यह ट्रेंड बताता है कि फैशन साइकिल हमेशा घूमकर वापस आता है।

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