सेल्फ-लव या दिखावा? क्या है सोशल मीडिया पर वायरल 'Main Character Energy' का असली मतलब
अपनी जिंदगी को किसी फिल्म के मुख्य किरदार की तरह जीना 'मेन कैरेक्टर एनर्जी' है, वो भी बिना किसी को नीचा दिखाए। ...और पढ़ें
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सोशल मीडिया पर क्यों लोग अपना रहे हैं मेन कैरेक्टर एनर्जी? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया में हर रोज नए शब्दों का जन्म होता है, लेकिन कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाते हैं। इन्ही में से एक है 'Main Character Energy'।
अगर आपने सोशल मीडिया पर किसी को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को एक फिल्म के सीन की तरह जीते हुए देखा है, तो समझ लीजिए कि वह अपने मेन कैरेक्टर एनर्जी में जी रहा है। इससे सवाल आता है कि आखिर इस शब्द का मतलब क्या है और क्यों आज की पीढ़ी इस शब्द की इतनी दीवानी है? आइए जानें इसके बारे में।
क्या है मेन कैरेक्टर एनर्जी?
आसान शब्दों में कहें तो, मेन कैरेक्टर एनर्जी का मतलब है खुद को अपनी जिंदगी की कहानी का मुख्य किरदार मानना। जैसे किसी फिल्म में सारा कैमरा और कहानी हीरो या हीरोइन के इर्द-गिर्द घूमती है, ठीक वैसे ही अपनी जिंदगी को किसी फिल्म और खुद को उस फिल्म का मुख्य पात्र मानना मेन कैरेक्टर एनर्जी कहलाता है ।
यह केवल दिखावा नहीं है, बल्कि एक माइंडसेट है। इसमें व्यक्ति खुद को साइड रोल या दूसरों की कहानी का हिस्सा मानने के बजाय खुद की खुशियों, फैसलों और अनुभवों को प्राथमिकता देता है। जब आप सुबह की कॉफी पीते हुए या बस में खिड़की के पास बैठकर संगीत सुनते हुए खुद को एक मूवी स्टार जैसा महसूस करते हैं, तो वही मेन कैरेक्टर एनर्जी है।

(AI Generated Image)
सोशल मीडिया पर क्यों वायरल है यह टर्म?
इस ट्रेंड के वायरल होने के पीछे कई कारण हैं, जैसे-
- सेल्फ लव का नया तरीका- पुराने समय में खुद को प्राथमिकता देना स्वार्थ माना जाता था, लेकिन आज की पीढ़ी इसे सेल्फ-केयर और सेल्फ-लव के रूप में देखती है। यह टर्म लोगों को खुद की कद्र करना सिखाता है।
- साधारण जिंदगी में जादू ढूंढना- महामारी के बाद जब दुनिया घरों में कैद थी, तब लोगों ने बोरियत से बचने के लिए अपनी छोटी-छोटी एक्टिविटीज को सिनेमैटिक बनाना शुरू किया। घर का काम करना या बालकनी में बैठना भी एक एस्थेटिक एक्सपीरिएंस बन गया।
- कंट्रोल का एहसास- अक्सर असल जिंदगी हमारे कंट्रोल में नहीं होती, लेकिन खुद को मेन कैरेक्टर मानकर लोगों को यह अहसास होता है कि वे अपनी कहानी के लेखक खुद हैं। यह उन्हें कॉन्फिडेंट देता है।
- विजुअल अपील- सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एस्थेटिक दिखने का बहुत महत्व है। स्लो-मोशन वीडियो और बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ अपनी जिंदगी को पेश करना इस ट्रेंड को और भी ग्लैमरस बनाता है।
क्या इसके कुछ नुकसान भी हैं?
हर चीज की तरह इसके भी दो पहलू हैं। जहां एक ओर यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर कभी-कभी यह नार्सिसिज्म की ओर ले जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति इतना सेल्फ सेंटर्ड हो जाए कि वह दूसरों की भावनाओं को नजरअंदाज करने लगे, तो यह व्यवहार टॉक्सिक हो सकता है। असल मेन कैरेक्टर एनर्जी वह है जहां आप अपना ग्लैमर बनाए रखें, लेकिन दूसरों को नीचा न दिखाएं।