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    फारस की 'लुकमात अल-कादी' कैसे बना 'गुलाब जामुन'? बहुत दिलचस्प है भारत की इस फेवरेट मिठाई का इतिहास

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 05:04 PM (IST)

    भारतीय घरों की पसंदीदा मिठाई गुलाब जामुन का इतिहास फारस से जुड़ा है, जहां से यह 'लुकमात अल-कादी' के रूप में भारत पहुंची। ...और पढ़ें

    भारत कैसे आया गुलाब जामुन? (AI Generated Image)

    भारत कैसे आया गुलाब जामुन? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शादी हो, कोई त्योहार या कोई खुशी का अवसर, भारतीय घरों में गुलाब जामुन जरूर आता है। ये मिठाई इतनी स्वादिष्ट और मुलायम होती है कि मुंह में जाते ही घुल जाती है। इसलिए कोई भी शुभ अवसर हो, ये मिठाई घर में जरूर आती है। 

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीयों की ये पसंदीदा मिठाई असल में कहीं और से भारत आई है? जी हां, गुलाब जामुन का जन्म भारत में नहीं हुआ है, बल्कि ये कहीं और से भारत पहुंची है। आइए जानें गुलाब जामुन का इतिहास क्या है और कैसे ये भारत पहुंची। 

    मध्य पूर्व से जुड़ा है इतिहास

    माना जाता है कि गुलाब जामुन का इतिहास फारस से जुड़ा है। दरअसल, ये मिठाई फारसी डिश लुकमात अल-कादी से इतनी मिलती जुलती है कि ये दोनों देखने में लगभग एक जैसे ही लगते हैं। अब सवाल आता है कि फारस की ये डिश भारत कैसे पहुंची होगी? 

    आक्रमणकारियों के साथ आई मिठाई?

    दरअसल, जब तुर्क और अफगान आक्रमणकारी भारत आए, तो उनके साथ उनके रसोइए और खान-पान की संस्कृति भी भारत आई। माना जाता है कि इसी तरह गुलाब जामुन भी भारत पहुंचा होगा। साथ ही, दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के दौरान शाही रसोइयों में फारसी पकवानों को भारतीय स्वाद और सामग्रियों के साथ मिलाकर बनाया जाने लगा। 

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    इसलिए माना जाता है मुगल काल के दौरान लुकमात अल-कादी को ही भारतीय सामग्री और स्वाद के साथ पकाकर गुलाब जामुन का रूप दिया गया होगा। 

    इसे गुलाब जामुन नाम क्यों दिया गया?

    गुलाब जामुन दो अलग-अलग शब्दों से मिलकर बना है। गुलाब फारसी शब्द गोल और आब से मिलकर बना है, जिसका मतलब होता है फूल और पानी। मध्य पूर्व में मिठाइयों की चाशनी में खुशबू के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इसका एक भाग गुलाब कहलाया। इसका दूसरा भाग पूरी तरह भारतीय है। इसे घी में धीमी आंच पर तला जाता है, जिससे इसका रंग बिल्कुल काला या भूरा हो जाता है। इसलिए इसके रंग के कारण इसे जामुन कहा गया। इन दो शब्दों को मिलाकर बना गुलाब जामुन। 

    भारतीय रसोई में बदलाव

    जब ये डिश भारत आई, तो इसमें कई बदलाव भी आए। लुकमात अल-कादी को मैदा और खमीर का इस्तेमाल करके बनाया जाता था, लेकिन भारत में इसे मावा, छेना और इलायची का इस्तेमाल करके बनाया गया। आज भारत में गुलाब जामुन के भी कई प्रकार देखने को मिल जाते हैं। कुछ जगहों पर गुलाब जामुन काले रंग के होते हैं, कहीं इन्हें भूरे रंग का बनाया जाता है। इसे गोल और लंबे आकार में भी बनाया जाता है। हालांकि, गुलाब जामुन का स्वाद हर जगह एक जैसा ही होता है।