टूथपेस्ट से नूडल्स तक, रोज की इन चीजों में मौजूद है पाम ऑयल; आखिर क्यों कहलाता है Liquid Gold?
पाम ऑयल, जिसे 'लिक्विड गोल्ड' भी कहते हैं, हमारे टूथपेस्ट से लेकर नूडल्स तक, कई रोजमर्रा की चीजों में मौजूद है। यह दुनिया का सबसे ज्यादा प्रोड्यूस होन ...और पढ़ें
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हर जगह मौजूद यह 'लिक्विड गोल्ड' क्यों है चर्चा में पाम ऑयल (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपकी सुबह की मुस्कान (टूथपेस्ट) से लेकर रात के स्नैक्स (नूडल्स) तक, एक 'अनचाहा मेहमान' हमारे घर के हर कोने में मौजूद है। नाम है- पाम ऑयल (Palm Oil)।
हम इसे सेहत का दुश्मन मानते हैं, इसे कोसते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों पूरी दुनिया में सुर्खियों में छाया यह तेल आखिर 'लिक्विड गोल्ड' (Liquid Gold) क्यों कहलाता है? चलिए, आज इस सुनहरे तेल की तह तक जाते हैं और जानते हैं इसकी असली कहानी।
आखिर पाम ऑयल है क्या?
पाम ऑयल ताड़ के पेड़ (Palm Tree) के फलों से निकलने वाला एक वनस्पति तेल यानी वेजिटेबल ऑयल है। इसे या तो फल के गूदे को निचोड़कर निकाला जाता है या उसकी गुठली को पीसकर।
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया का 'नंबर 1' तेल है। इसका मतलब यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन इसी तेल का होता है। इसका प्रोडक्शन इतना ज्यादा होता है कि इसने सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल को भी पीछे छोड़ दिया है। हर साल करीब 8 करोड़ टन पाम ऑयल बनाया जाता है।

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पाम ऑयल के 3 मुख्य प्रकार होते हैं
- रिफाइंड पाम ऑयल: इसे प्रोसेस करके इसका रंग और गंध हटा दी जाती है। पाम ऑयल के इस टाइप का इस्तेमाल आमतौर पर खाए जाने वाले चिप्स, बिस्कुट और बेकरी के सामान में होता है।
- रेड पाम ऑयल: यह कम प्रोसेस्ड होता है, इसलिए इसका लाल रंग ही बना रहता है। इसमें विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा होते हैं।
- पाम कर्नेल ऑयल: यह ऑयल फल के बीज से बनता है। यह कमरे के तापमान यानी रूम टेम्परेचर पर जम जाता है, इसलिए इसका इस्तेमाल साबुन, शैम्पू और कॉस्मेटिक्स बनाने के लिए किया जाता है।
क्या यह सेहत के लिए अच्छा है?
यह जैतून (Olive) या कैनोला ऑयल जितना हेल्दी तो नहीं होता, लेकिन इसे लेकर अलग-अलग राय है। कुछ रिसर्च कहती हैं कि यह दिल के लिए ठीक है। कुछ कहती हैं कि इससे हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेजाइनेशन (WHO) का कहना है कि अभी इस पर और रिसर्च की जरूरत है।
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कहां-कहां छिपा है पाम ऑयल?
आपने शायद ही कभी गौर किया होगा, लेकिन लिक्विड गोल्ड कहलाने वाला यह ऑयल आपकी रोजमर्रा की लगभग हर चीज में शामिल है। यह पिज्जा, आइसक्रीम, नूडल्स, चॉकलेट (जैसे Nutella), लिपस्टिक, साबुन और टूथपेस्ट जैसी हर चीज मौजूद है। बस इसे पहचान पाना कई बार मुश्किल होता है, क्योंकि पैकेट पर यह अलग-अलग नामों से लिखा हो सकता है।

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पाम ऑयल के नुकसान
- कैंसर का डर: एक स्टडी के मुताबिक, अगर इस तेल को बहुत ज्यादा तापमान (200 डिग्री सेल्सियस) पर गर्म किया जाए, तो यह कैंसर का खतरा पैदा कर सकता है।
- भरोसे की कमी: जैसे तंबाकू कंपनियां सच छिपाती थीं, वैसे ही पाम ऑयल इंडस्ट्री पर भी आरोप है कि वे अपने फायदे के लिए रिसर्च को प्रभावित करते हैं। इसलिए लोगों में इसे लेकर भरोसे की कमी है।
- पर्यावरण का दुश्मन: पाम ऑयल के बागान लगाने के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया में बड़े पैमाने पर जंगल काटे जा रहे हैं। इससे जानवरों के घर उजड़ रहे हैं और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। ऐसे में यह सेहत साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक माना जाता है।

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