आपकी चॉकलेट में असली कोको बटर है या सिर्फ वेजिटेबल फैट? ऐसे पहचान करेंगे, तो नहीं खाएंगे धोखा
क्या आप जानते हैं जिस चीज को आप बड़े चाव से चॉकलेट समझकर खरीद रहे हैं, वह असल में चॉकलेट का बहरूपिया यानी 'कंपाउंड स्लैब' हो सकता है। ...और पढ़ें

चॉकलेट खरीदते समय क्यों रैपर देखना है जरूरी? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी चॉकलेट के नाम पर 'कंपाउंड स्लैब' तो नहीं चबा रहे? जी हां, बाजार में असली चॉकलेट के भेष में ये नकली स्लैब धड़ल्ले से बिकते हैं। दिखने में ये हूबहू आपकी फेवरेट चॉकलेट जैसे लगते हैं, लेकिन गुणों के मामले में ये असली चॉकलेट के आस-पास भी नहीं फटकते।
बता दें, असली राज छिपा है इसे बनाने के तरीके में। जहां एक शानदार, असली चॉकलेट 'कोको बटर' के इस्तेमाल से बनती है, वहीं इन कंपाउंड स्लैब को बनाने के लिए 'वेजिटेबल फैट' का यूज किया जाता है, जो सेहत के लिए किसी भी लिहाज से सही नहीं है।
आज 7 जुलाई यानी World Chocolate Day के इस स्पेशल मौके पर, हम आपके लिए लाए हैं कुछ ऐसी जबरदस्त और आसान ट्रिक्स, जिनसे आप चुटकियों में असली और नकली का फर्क पकड़ना सीख जाएंगे।

(Image Source: AI-Generated)
पैकेट के पीछे लिखी सामग्री पढ़ें
यह सबसे आसान और पक्का तरीका है। जब भी आप चॉकलेट खरीदें, तो पैकेट के पीछे लिखे 'Ingredients' जरूर पढ़ें।
- असली चॉकलेट: इसमें आपको मुख्य रूप से 'कोको मास', 'कोको सॉलिड्स' और 'कोको बटर' लिखा हुआ दिखेगा।
- कंपाउंड स्लैब: इसके पैकेट पर आपको 'वेजिटेबल फैट', 'एडिबल वेजिटेबल ऑयल' या 'हाइड्रोजेनेटेड फैट' लिखा मिलेगा। इसका मतलब है कि आप कोको बटर नहीं, बल्कि जमा हुआ तेल खा रहे हैं।
मुंह में पिघलने का अहसास
कोको बटर की खासियत यह होती है कि यह हमारे शरीर के तापमान पर आते ही पिघलने लगता है। बता दें, जब आप असली चॉकलेट का टुकड़ा मुंह में रखेंगे, तो वह मक्खन की तरह मुलायम तरीके से पिघल जाएगा और एक शानदार स्वाद देगा। दूसरी ओर, अगर आप कंपाउंड चॉकलेट खाएंगे, तो वह मुंह में आसानी से नहीं पिघलेगी। आपको उसे चबाना पड़ेगा और खाने के बाद आपके मुंह या तालू पर मोम जैसी एक चिपचिपी परत महसूस होगी।
तोड़ने पर आने वाली 'स्नैप'की आवाज
असली और अच्छी क्वालिटी की चॉकलेट को जब आप हाथ से तोड़ते हैं, तो उसमें से एक तेज 'खट' की आवाज आती है। टूटने वाली जगह बिल्कुल साफ और किनारे तीखे होते हैं। वहीं, वेजिटेबल फैट से बना कंपाउंड स्लैब इतनी आसानी से नहीं टूटता। वह थोड़ा रबर जैसा खिंचता है और उसे तोड़ने पर कोई तेज आवाज नहीं आती।
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हाथ में पकड़कर देखें
जैसा कि हमनें बताया, कोको बटर शरीर की गर्मी से पिघलता है। अगर आप असली चॉकलेट को कुछ सेकंड के लिए अपनी उंगलियों के बीच पकड़ेंगे, तो वह आपकी उंगलियों पर पिघलने लगेगी और निशान छोड़ देगी, लेकिन कंपाउंड स्लैब आसानी से नहीं पिघलता, क्योंकि वेजिटेबल फैट का मेल्टिंग पॉइंट ज्यादा होता है।
कीमत पर भी करें गौर
कोको बटर काफी महंगा होता है, इसलिए असली चॉकलेट की कीमत भी थोड़ी ज्यादा होती है। इसके विपरीत, वेजिटेबल फैट बहुत सस्ते होते हैं। अगर आपको बाजार में कोई बहुत बड़ा चॉकलेट का स्लैब या बार बहुत ही कम दाम में मिल रहा है, तो समझ जाइए कि वह असली चॉकलेट नहीं, बल्कि सिर्फ एक मीठा कंपाउंड है।
इसलिए, जब आप अपने लिए या अपने बच्चों के लिए चॉकलेट खरीदने जाएं, तो सिर्फ खूबसूरत पैकिंग या मीठे स्वाद पर मत जाइए। पैकेट को पलटिए और देखिए कि आप सच में सेहतमंद और स्वादिष्ट 'कोको बटर' खरीद रहे हैं, या सिर्फ सस्ता 'वेजिटेबल फैट'। असली चॉकलेट थोड़ी महंगी जरूर हो सकती है, लेकिन इसका स्वाद और इससे मिलने वाली खुशी बिल्कुल असली होती है।