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भारत में 4.1 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार! खतरे की घंटी के बीच ICMR ने बनाए स्कूलों के लिए नए नियम

Published: Sat, 25 Jul 2026 05:53 PM (IST)

वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत में 4.1 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं।

बच्चों में मोटापे की समस्या रोकने के लिए ICMR का नया प्लान (Picture Courtesy: Freepik)

बच्चों में मोटापे की समस्या रोकने के लिए ICMR का नया प्लान (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की सेहत को लेकर एक बहुत ही चिंता वाली बात सामने आई है। वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, देश के लगभग 4.1 करोड़ बच्चे ओवरवेट या मोटापे के शिकार हो चुके हैं। मोटापा सिर्फ शारीरिक बनावट से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि ये आगे चलकर कई बीमारियों की वजह भी बन सकता है। 

ऐसे में मोटापे की समस्या पर लगाम लगाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने नया रोडमैप तैयार किया है। इसमें उन्होंने अनहेल्दी और प्रोसेस्ड फूड्स पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। 

क्या है ICMR का नया प्रस्ताव?

बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए ICMR ने सुझाव दिया है कि पैकेज्ड फूड्स के पैकेट के आगे ही पोषण से जुड़ी जानकारी दी जाए, ताकि कोई भी प्रोडक्ट खरीदते समय लोग एक्टिविली देख सकें कि वो बच्चों को क्या खिला रहे हैं और कितनी मात्रा में खिला रहे हैं। 

इसके साथ ही, बच्चों को टार्गेट करने वाले अनहेल्दी फूड्स के विज्ञापनों पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। बच्चे विज्ञापन देखकर अनहेल्दी खाने की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे मोटापे की समस्या बढ़ रही है। साथ ही, ज्यादा फैट, शुगर और नमक वाले फूड्स पर ज्यादा टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव दिया है और स्कूल में खान-पान के माहौल को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

स्कूलों के 50 मीटर के दायरे के अंदर जंक फूड पर बैन लगाना भी इस प्रस्ताव में शामिल है, ताकि स्कूल से निकलते ही बच्चे अनहेल्दी खाना न खाएं। इन नियमों का पालन सही तरीके से हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण और सख्त मॉनिटरिंग की सिफारिश की गई है।

स्कूल कैंटीन में मिल रहे अनहेल्दी फूड्स

उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में की गई एक स्टडी में पाया गया है कि स्कूल की कैंटीन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स और शुगरी ड्रिंक्स काफी आसानी से मिल रहे हैं। इसके साथ ही, पोषण से जुड़ी सुविधाएं और नियम सिर्फ कागजों तक ही सिमटे हुए हैं। 

इस रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि HFSS फूड्स यानी हाई इन फैट, शुगर एंड सॉल्ट फूड्स की कोई कानूनी परिभाषा न होने के कारण भी इन नियमों को लागू करना मुश्किल हो रहा है। 

2030 तक बिगड़ेंगे हालात

इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर बच्चों में मोटापे की समस्या को कंट्रोल नहीं किया गया, तो साल 2030 तक दुनियाभर में बच्चों में मोटापे के 11% मामले सिर्फ भारत में होंगे। साथ ही, यह भी पता चला है कि अभी देश में बीमारियों का 56.4% बोझ सिर्फ खराब खान-पान की वजह से है।   


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