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    बाहर से फिट, लेकिन अंदर से बीमार तो नहीं? शरीर में छिपी सूजन के इन 8 संकेतों को न करें नजरअंदाज

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 09:23 AM (IST)

    क्रॉनिक इंफ्लेमेशन के कारण दिल की बीमारियों और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ...और पढ़ें

    कैसे करें अंदरूनी सूजन की पहचान? (Picture Courtesy: Freepik)

    कैसे करें अंदरूनी सूजन की पहचान? (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शरीर में सूजन होना इम्यून सिस्टम का एक नॉर्मल रिएक्शन है, जो किसी चोट या इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है। लेकिन जब यह सूजन बिना किसी बाहरी कारण के लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे क्रोनिक इंफ्लेमेशन कहा जाता है। 

    यह स्थिति शरीर के हेल्दी टिश्यूज को नुकसान पहुंचाने लगती है और हार्ट डिजीज, डायबिटीज व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसलिए क्रॉनिक इंफ्लेमेशन के लक्षणों की पहचान जरूरी है, ताकि आप समय पर डॉक्टर से मदद ले सकें। आइए जानें शरीर में पुरानी सूजन के लक्षण कैसे नजर आते हैं और इसके पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। 

    शरीर में बढ़ी हुई सूजन के संकेत

    सूजन हमेशा बाहर से दिखाई नहीं देती, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करती है। 

    • लगातार दर्द- अगर शरीर के किसी हिस्से या मांसपेशियों में बिना किसी चोट के लगातार दर्द बना रहता है, तो यह अंदरूनी सूजन का संकेत हो सकता है।
    • थकान और इनसोम्निया- आराम के बाद भी थकान महसूस होना या रात में नींद न आना इस बात का इशारा है कि आपका शरीर किसी तनाव या सूजन से जूझ रहा है।
    • जोड़ों में जकड़न- सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न या दर्द महसूस होना सूजन का एक सामान्य लक्षण है, जो आगे चलकर अर्थराइटिस का रूप ले सकता है।
    • त्वचा संबंधी समस्याएं- चेहरे पर मुहांसे, रेडनेस या सोरायसिस जैसी समस्याएं शरीर में बढ़ी हुई सूजन का संकेत हो सकते हैं।
    • बढ़े हुए ब्लड मार्कर्स- सूजन बढ़ने के कारण ब्लड टेस्ट में C-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। इसका पता नॉर्मल ब्लड टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है। 
    • पाचन संबंधी समस्याएं- कब्ज, दस्त या एसिड रिफ्लक्स का बार-बार होना बिगड़े हुए पाचन तंत्र और आंतों की सूजन का संकेत है।
    • मेंटल हेल्थ- सूजन का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है, जिससे डिप्रेशन, एंग्जायटी और चिड़चिड़ेपन की समस्या हो सकती है।
    • वजन में अचानक बदलाव- बिना किसी कारण के वजन का अचानक बढ़ना या तेजी से कम होना भी क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से जुड़ा हो सकता है।
    Anti Inflammatory Foods
    (AI Generated Image)

    क्या हैं क्रॉनिक इंफ्लेमेशन के रिस्क फैक्टर्स?

    सूजन रातों-रात नहीं बढ़ती, बल्कि यह हमारी लाइफस्टाइल और आदतों का नतीजा होती है।

    • एक्सरसाइज न करना- एक्सरसाइज न करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे सूजन बढ़ती है।
    • क्रोनिक स्ट्रेस- मानसिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बिगाड़ देता है, जो सूजन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
    • मोटापा और पेट की चर्बी- अगर आपका BMI 30 या उससे ज्यादा है, खासकर पेट के आसपास की चर्बी, तो यह ऐसे केमिकल रिलीज करने लगता है, जो सूजन को बढ़ावा देते हैं।
    • आंतों का स्वास्थ्य बिगड़ना- हमारी आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।
    • गलत खान-पान- ज्यादा नमक, ट्रांस फैट, चीनी और प्रोसेस्ड फूड खाना भी सूजन के सबसे बड़े कारणों में से एक है।
    • नींद की कमी- नींद और सर्केडियन रिदम बिगड़ने के कारण भी शरीर में सूजन बढ़ती है।
    • टॉक्सिन्स का प्रभाव- प्रदूषण, केमिकल्स और जहरीले कचरे के संपर्क में रहने से भी शरीर के सेल्स प्रभावित होते हैं।
    • नशीले पदार्थ- तंबाकू और शराब भी शरीर के अंगों में सीधे तौर पर सूजन पैदा करते हैं।


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