खराब पोस्चर दे रहा जोड़ों को उम्रभर का दर्द, जानिए लगातार बैठने से शरीर पर क्या पड़ता है असर
अगर आप भी अपना ज्यादातर समय कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं, तो यह आदत आपके शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा रही है, आइए जानते हैं। ...और पढ़ें

कुर्सी पर घंटों बैठना आपकी रीढ़ के लिए है खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए, हजारों सालों के विकास के बाद प्रकृति ने इंसानी शरीर को कैसे गढ़ा था? मीलों तक चलने, ऊंचाइयों पर चढ़ने-उतरने और दिन भर तरह-तरह की शारीरिक मेहनत करने के लिए... लेकिन आज के 'आधुनिक' इंसान का रूटीन क्या है? सुबह से शाम तक बस एक कुर्सी पर जमे रहना और लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रखना।
जयपुर के सीके बिरला हॉस्पिटल्स के फिजियोथेरेपी विभाग के निदेशक डॉ. आशीष अग्रवाल ने हमारी इसी लाइफस्टाइल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सच उजागर किया है। उनका कहना है कि तकनीक ने हमारे काम की रफ्तार तो जरूर बढ़ा दी है, लेकिन हमारा मौजूदा वर्क एनवायरनमेंट हमारे शरीर की प्राकृतिक बनावट, जोड़ों और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के बिल्कुल खिलाफ है।

(Image Source: AI-Generated)
गर्दन पर पड़ता है 35 किलो का भारी बोझ
लगातार स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखने का सबसे बड़ा और खतरनाक असर हमारे 'पोस्चर' पर पड़ता है। क्या आप जानते हैं कि एक वयस्क इंसान के सिर का वजन लगभग 5 से 6 किलो होता है? लेकिन जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखने के लिए अपनी गर्दन को आगे की तरफ 60 डिग्री तक झुकाते हैं, तो गर्दन पर यह वजन 5-6 गुना तक बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि उस वक्त आपकी गर्दन को लगभग 30 से 35 किलो का भार सहना पड़ता है।
यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को अपनी जिंदगी में कभी न कभी पीठ या गर्दन के दर्द से गुजरना पड़ता है। खराब पोस्चर के कारण लोग क्रोनिक नेक पेन, कंधे की अकड़न, तनाव और सिरदर्द का शिकार हो रहे हैं।
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रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है खतरनाक दबाव
कुर्सी पर घंटों जमे रहने से सबसे ज्यादा नुकसान हमारी रीढ़ की हड्डी को होता है। जब हम लंबे समय तक बैठते हैं, तो पीठ के निचले हिस्से की डिस्क पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है। खड़े होने या चलने-फिरने से रीढ़ की हड्डी में जो प्राकृतिक लचीलापन बना रहता है, वह लगातार बैठने से खत्म होने लगता है। नतीजा यह होता है कि ऑफिस में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी लोअर बैक पेन, जोड़ों में अकड़न और मानसिक तनाव की शिकायत करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
जोड़ और मांसपेशियां भी चुका रहे हैं भारी कीमत
सिर्फ रीढ़ की हड्डी ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर के जोड़ भी इस सुस्त लाइफस्टाइल का खामियाजा भुगत रहे हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से जोड़ों का मूवमेंट सीमित हो जाता है और आस-पास के टिश्यूज में ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है।
इसका सीधा असर हमारे कूल्हे, घुटने, कलाई और कंधों पर पड़ता है। दिन भर बैठे रहने वाले लोगों में कूल्हे की मांसपेशियां कमजोर होना, कम उम्र में ही घुटनों में आर्थराइटिस या स्पोंडिलोसिस होना बहुत आम बात हो गई है। इसके अलावा, लगातार टाइपिंग करने या माउस का उपयोग करने से कलाई और कोहनी में खिंचाव आता है, जिससे 'टेनिस एल्बो' या 'कार्पल टनल सिंड्रोम' जैसी परेशानियां तेजी से कॉमन हो रही हैं।
तो फिर समाधान क्या है?
इन सभी समस्याओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है वर्कप्लेस पर सही 'एर्गोनॉमिक' डिजाइन अपनाना।
- सही सेटअप: एडजस्टेबल कुर्सियां, मॉनिटर स्टैंड, स्टैंडिंग डेस्क और कीबोर्ड को सही जगह पर रखने से रीढ़ और जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम हो जाता है।
- बीच-बीच में ब्रेक लें: काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लेना, थोड़ा चलना-फिरना, खड़े होना और अपनी डेस्क पर ही हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहद जरूरी है।
- पोस्चर पर ध्यान दें: अपने बैठने के तरीके को लेकर हमेशा जागरूक रहें।
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