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    डायबिटीज सिर्फ आपके दिल ही नहीं, दिमाग की भी है दुश्मन; बचाव के लिए आज भी कारगर हैं 6 तरीके

    By Meenakshi NaiduEdited By: Nikhil Pawar
    Updated: Thu, 16 Jul 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

    डायबिटीज सिर्फ दिल ही नहीं, दिमाग को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है, जिससे डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है। ...और पढ़ें

    हाई ब्लड शुगर बढ़ा सकता है डिमेंशिया और अल्जाइमर का जोखिम (Image Source: AI-Generated)

    हाई ब्लड शुगर बढ़ा सकता है डिमेंशिया और अल्जाइमर का जोखिम (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी डायबिटीज का जिक्र होता है, तो हम अक्सर इसे केवल हार्ट प्रॉब्लम, किडनी की बीमारी या ब्लड शुगर लेवल से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह 'साइलेंट किलर' आपके दिमाग पर भी सीधा और गहरा वार करता है?

    जी हां, लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर आपके मानसिक संतुलन, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह कई गंभीर दिमागी बीमारियों का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कि शुगर आपके दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाती है और इससे क्या-क्या खतरे हो सकते हैं।

    Diabetes

    (Image Source: AI-Generated) 

    डायबिटीज से होने वाले 6 दिमागी खतरे

    याददाश्त का कमजोर होना

    जब शरीर में शुगर लेवल लंबे समय तक हाई रहता है, तो इससे दिमाग की छोटी-छोटी खून की नलिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इसका सीधा असर यह होता है कि दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में नहीं पहुंच पाते। नतीजतन, इंसान छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है, किसी काम पर फोकस करना मुश्किल हो जाता है और सही फैसले लेने की क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है।

    डिमेंशिया और अल्जाइमर का बढ़ता खतरा

    कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग डायबिटीज के शिकार हैं, उनमें 'डिमेंशिया' और 'अल्जाइमर' जैसी भूलने वाली बीमारियों का खतरा आम लोगों से कहीं ज्यादा होता है। हाई ब्लड शुगर धीरे-धीरे ब्रेन सेल्स को डैमेज करती है और न्यूरॉन्स के बीच होने वाले आपसी संचार को प्रभावित करती है, जिससे सोचने-समझने की ताकत छिनने लगती है।

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    स्ट्रोक का जोखिम

    डायबिटीज के मरीजों में खून की नसें सख्त और सिकुड़ जाती हैं। इस वजह से दिमाग तक पहुंचने वाली ब्लड सप्लाई में रुकावट आ सकती है, जो स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बनता है। स्ट्रोक आने पर मरीज को लकवा मार सकता है, बोलने में दिक्कत आ सकती है और हमेशा के लिए ब्रेन डैमेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    डिप्रेशन और एंजाइटी का शिकार होना

    ब्लड शुगर सिर्फ आपके शरीर को ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। शुगर लेवल में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, तनाव और नींद न आने जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अगर यह स्थिति लंबे वक्त तक बनी रहे, तो व्यक्ति गंभीर डिप्रेशन और एंग्जायटी के चंगुल में फंस सकता है।

    नर्व डैमेज यानी न्यूरोपैथी

    शुगर के कंट्रोल में न रहने पर नसों को जो नुकसान होता है, उसे 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' कहते हैं। वैसे तो इसका असर ज्यादातर हाथों और पैरों में महसूस होता है, लेकिन यह दिमाग से जुड़े नर्व सिग्नल्स को भी बिगाड़ सकता है। इसके कारण शरीर का बैलेंस बिगड़ना या सिर घूमने जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं।

    ब्रेन फॉग और कन्फ्यूजन

    जब ब्लड शुगर अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ जाए या बहुत कम हो जाए, तो दिमाग सुन्न सा महसूस होने लगता है। इस स्थिति को 'ब्रेन फॉग' कहते हैं। इसमें मरीज को हर समय कंफ्यूजन, चक्कर और किसी भी चीज पर ध्यान न लगा पाने की समस्या होती है, जिसका सीधा असर उसकी रोजमर्रा की जिंदगी और प्रोफेशनल लाइफ पर पड़ता है।

    डायबिटीज से बचाव के 6 आसान उपाय

    अगर आप इन गंभीर दिमागी बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो आज से ही अपने लाइफस्टाइल में ये जरूरी बदलाव करें:

    • नियमित जांच: अपना ब्लड शुगर रेगुलर चेक करें और डॉक्टर की दी हुई दवाइयां समय पर लें।
    • मीठे से दूरी: अपनी डाइट में मीठा, रिफाइंड कार्ब्स और जंक फूड का सेवन बिल्कुल कम कर दें।
    • हेल्दी डाइट लें: अपनी थाली में हरी सब्जियां, ताजे फल, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें।
    • फिजिकल एक्टिविटी: हर दिन कम से कम 30 मिनट वॉक करें, योग अपनाएं या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जरूर करें।
    • स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव को खुद पर हावी न होने दें और हर रात पर्याप्त व गहरी नींद लें।
    • बुरी आदतों से बचें: शराब पीने और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।

    सही डाइट, नियमित व्यायाम और स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल अपनाकर आप न सिर्फ अपनी शुगर को कंट्रोल में रख सकते हैं, बल्कि अपने दिमाग को भी हमेशा के लिए फिट और सेहतमंद बनाए रख सकते हैं।

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    Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।