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    यूरिन में खून आना साधारण नहीं, ये लक्षण बताते हैं कि अब किडनी टेस्ट कराना बेहद जरूरी है

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 12:37 PM (IST)

    किडनी शरीर से एक्स्ट्रा फ्लूड बाहर निकालने और बेकार पदार्थ फिल्टर करने में बड़ी अहम भूमिका निभाती है। ...और पढ़ें

    यूरिन में ब्लड आने के कारण (Image Source: AI Generated)

    यूरिन में ब्लड आने के कारण (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किडनी शरीर से एक्स्ट्रा फ्लूड बाहर निकालने और बेकार पदार्थ फिल्टर करने में बड़ी अहम भूमिका निभाती है। नॉर्मल कंडीशन में यूरिन हल्का पीला या पीला होता है, क्योंकि यूरिन का रंग पूरी तरह से व्यक्ति के हाइड्रेशन पर निर्भर करता है। हालांकि, जब यूरिन में ब्लड आने लगे तो उसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह यूरिन ट्रैक्ट में गड़बड़ी होने की तरफ इशारा करता है। इसी को मेडिकल भाषा में इसे हेमट्यूरिया कहा जाता है। यहां कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड (मुंबई), डॉ. रुषभ शाह बता रहे हैं कि कब यूरिन में खून आना एक खतरे की घंटी है। 

    यूरिन में खून आने के कारण 

    यूरिन में खून आने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे- यूरिनरी सिस्टम में किसी बीमारी का बनना, इसमें यूरेटर्स, यूरिनरी ब्लैडर, प्रोस्टेट (पुरुषों में) और यूरेथ्रा शामिल है। वहीं, हेमट्यूरिया के सामान्य कारणों में पथरी, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTIs), किडनी इन्फेक्शन, पुरुषों में बड़ा प्रोस्टेट, हेवी एक्सरसाइज, कई दवाइयां, किडनी के फिल्टर के काम में दखल देने वाली ग्लोमेरुलस बीमारी और किडनी या यूरिनरी ब्लैडर ट्यूमर शामिल हो सकते हैं। 

    लैबोरेटरी टेस्टिंग क्यों जरूरी है? 

    कई बार खून को यूरिन में गुलाबी, लाल या भूरे रंग में देखा जा सकता है, पर कई मामलों में यह ब्लड यूरिन में इतना कम होता है कि पता ही नहीं चल पाता। इसके लिए लैबोरेटरी टेस्टिंग की जरूरत पड़ती है ताकि छोटी या कोई भी बड़ी बीमारी के बारे में जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। यह भी जान लेने वाली बात है कि यूरिन में ब्लड के कुछ मामले मामूली से होते हैं तो कुछ मामलों मे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत होती है। इसी वजह से लैबोरेटरी टेस्टिंग अहम रोल निभाती है। 

    लैबोरेटरी टेस्टिंग के लिए कब जाएं? 

    1. यूरिन निकलते समय दर्द या जलन होना 

    1. लाल, गुलाबी या भूरे रंग का झागदार यूरिन निकलना 

    1. बार-बार यूरिनेट की इच्छा 

    1. ब्लैडर पूरी तरह से खाली न होना 

    1. पेट के निचले हिस्से, कमर और उसके साइड में दर्द 

    1. चेहरे, पैरों और एड़ियों में सूजन 

    1. बिना वजह बुखार या वजन कम होना 

    1. पहले यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होना 

    1. लंबे समय से हाई बीपी या डायबिटीज 

    1. किडनी की बीमारी फैमिली हिस्ट्री 

    1. कोई पुरानी क्रोनिक बीमारी 

    1. बढ़ती उम्र 

    लैबोरेटरी टेस्टिंग के फायदे 

    किडनी की हेल्थ जानने के लिए लैबोरेटरी टेस्टिंग बड़ा रोल निभाती है क्योंकि इससे हेमट्यूरिया का पता चलता है। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर यूरिन की रूटीन जांच, बैक्टीरियोलॉजिकल कल्चर और किडनी फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इसमें भी यूरिन रूटीन और माइक्रोस्कोपी सबसे पहला और जरूरी टेस्ट होता है जो रेड ब्लड सेल्स, पस या व्हाइट ब्लड सेल्स, प्रोटीन्स, शुगर, क्रिस्टल्स और पॉइंटर्स का पता लगाने में मदद करती है। 

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    किडनी की बेहतर सेहत के लिए क्या करें? 

    वैसे तो यूरिन में ब्लड आने के सभी कारणों से बचाव नहीं किया जा सकता, पर सामान्य तौर पर अगर किडनी की सेहत अच्छी रखी जा सकती है। इन आदतों में दिनभर में पर्याप्त पानी पीना, हेल्दी लाइफस्टाइल, बैलेंस डाइट, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना, शुगर लेवल ठीक बनाए रखना और हर छोटे-मोटे दर्द पर बेवजह पेनकिलर न खाना शामिल है। 

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