10 दिन का योग और खान-पान में बदलाव, 9 महीनों तक हाइपरटेंशन के मरीजों को देता है चौंकाने वाले फायदे
एक नई रिसर्च के अनुसार, 10 दिन का योग, नेचुरोपैथी और सही खान-पान का प्रोग्राम हाई ब्लड प्रेशर और तनाव से परेशान लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है।

सिर्फ बीपी ही नहीं, नर्वस सिस्टम भी होगा दुरुस्त! (Image Source: AI-Generated)
HighLights
10 दिन का योग और खान-पान हाइपरटेंशन में देता है लाभ
रिसर्च: 262 लोगों पर 9 महीने तक असरदार रहा प्रोग्राम
ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम और कार्डियोवैस्कुलर कामकाज में सुधार होता है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी हाई ब्लड प्रेशर और तनाव से परेशान हैं? एक नई रिसर्च के मुताबिक, महज 10 दिन का एक खास रूटीन आपके शरीर में ऐसे बेहतरीन बदलाव ला सकता है, जिनका असर अगले 9 महीनों तक बना रहता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस रिसर्च में क्या अहम बातें सामने आई हैं।
हाई बीपी से राहत का प्राकृतिक तरीका
रिसर्च के अनुसार, अगर योग, नेचुरोपैथी और खान-पान के सही बदलावों को मिलाकर एक 10 दिन का प्रोग्राम अपनाया जाए, तो यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह प्रोग्राम मरीजों के शरीर के 'ऑटोनोमिक रेगुलेशन' में ऐसे सकारात्मक बदलाव लेकर आता है, जो प्रोग्राम खत्म होने के नौ महीने बाद तक टिके रहते हैं।
262 लोगों पर हुई रिसर्च में हुआ अहम खुलासा
उजिरे स्थित एसडीएम कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंसेज के शोधकर्ताओं ने यह जानने के लिए 262 लोगों पर एक 'रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल' किया। इस स्टडी में सामने आया कि जिन लोगों ने इस 10 दिन के प्रोग्राम में हिस्सा लिया, उनके 'हार्ट रेट वेरिएबिलिटी' में बदलाव देखने को मिले।
आपको बता दें कि एचआरवी एक नॉन-इनवेसिव (बिना किसी दर्द या चीर-फाड़ वाला) तरीका है। इसका इस्तेमाल ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम के कामकाज की जांच करने के लिए किया जाता है। शोधकर्ताओं को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात से हुई कि प्रोग्राम के खत्म होने के पूरे नौ महीने बाद भी मरीजों में ये बदलाव साफ तौर पर देखे गए। यह महत्वपूर्ण शोध 'जर्नल ऑफ बॉडीवर्क एंड मूवमेंट थेरेपीज' में प्रकाशित हुआ है।
हाइपरटेंशन सिर्फ बीपी बढ़ने की बीमारी नहीं है
इस अध्ययन के बारे में जानकारी देते हुए एसडीएम कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड यौगिक साइंसेज की वाइस प्रिंसिपल, डॉ. सुजाता के. जे. ने एक बेहद अहम बात बताई। उन्होंने कहा, "हाइपरटेंशन केवल ब्लड प्रेशर के बढ़ने की बीमारी नहीं है। इसका सीधा संबंध इस बात से भी है कि हमारा ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम हमारे कार्डियोवैस्कुलर कामकाज को किस तरह से रेगुलेट करता है।"
डॉक्टर सुजाता ने आगे समझाया कि जब हमारा यह रेगुलेटरी सिस्टम तनाव में होता है, तो शरीर की सिम्पैथेटिक और पैरासिम्पैथेटिक गतिविधियों के बीच का संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
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