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    हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक नहीं हैं एक, समय रहते इन लक्षणों से करें जानलेवा खतरे की पहचान

    Updated: Wed, 27 May 2026 02:23 PM (IST)

    कई लोग हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये दोनों काफी अलग हैं। इनके लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। ...और पढ़ें

    हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन को न समझें एक (Picture Courtesy: Freepik)

    हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन को न समझें एक (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नौतपा में गर्मी का प्रकोप अपने प्रचंड रूप में होता है। पारा बढ़ने के साथ सबसे बड़ी चुनौती शरीर का तापमान नियंत्रित करना और खुद को हाइड्रेट रखना होता है। ऐसा न करने से हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक होने का खतरा रहता है।

    अक्सर लोग इन दोनों कंडीशन को एक ही मान लेते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। इन दोनों के लक्षणों में काफी अंतर है, जिन्हें समय पर पहचानकर इलाज लेना काफी जरूरी है। हीट एग्जॉशन जहां शरीर में पानी और नमक की कमी का शुरुआती संकेत है, वहीं हीट स्ट्रोक एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है। आइए जानें इन दोनों में आप कैसे अंतर पहचान सकते हैं। 

    हीट एग्जॉशन  के लक्षण कैसे होते हैं?

    हीट एग्जॉशन तब होता है जब शरीर ज्यादा गर्मी और पानी की कमी के कारण खुद को ठंडा नहीं रख पाता है। इस स्थिति में शरीर के अंदर का तापमान आमतौर पर 101 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। इस वजह से शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं-

    • शरीर से बहुत ज्यादा पसीना आना, त्वचा छूने पर ठंडी और चिपचिपी महसूस होती है। 
    • इलोकेट्रोलाइट्स के इंबैलेंस के कारण मांसपेशियों में तेज ऐंठन होना।
    • बहुत तेज सिरदर्द, चक्कर आना, बहुत थकान, कमजोरी और बहुत ज्यादा प्यास महसूस होना।
    • लगातार जी मचलना या उल्टी होना।
    • दिल की धड़कने काफी तेज हो जाना, पल्स बहुत तेज होना और सांसे बहुत तेज और गहरी होने लगती है। 
    Heat stroke vs Heat exhaution (1)
    (Picture Courtesy: Freepik)

    हीट स्ट्रोक  के लक्षण कैसे होते हैं? 

    जब हीट एग्जॉशन का समय पर इलाज नहीं होता, तो वह हीट स्ट्रोक में बदल जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। यह तब होता है जब शरीर तापमान नियंत्रित करने में पूरी तरह फेल हो जाता है और तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर चला जाता है। यह स्थिति सीधे दिमाग और शरीर के दूसरे ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा सकती है।

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    इस स्थिति में ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं-

    • व्यक्ति के व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन, कन्फ्यूजन, गुस्सा या आक्रामकता आ जाती है। वह बेहोश हो सकता है, बड़बड़ाने लगता है और उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती है।
    • त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा लाल या पीला पड़ जाता है। सामान्य हीट स्ट्रोक में त्वचा बिल्कुल सूखी हो जाती है, जबकि बहुत ज्यादा मेहनत करने के कारण होने वाले हीट स्ट्रोक में पसीना आ सकता है।
    • मरीज की आंखों के सामने धुंधलापन छा जाता है, शरीर में भारी कमजोरी आती है और उसे दौरे तक पड़ सकते हैं।
    • दिल की धड़कनें बहुत तेज हो जाती हैं, सांसें तेज चलने लगती हैं और ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। साथ ही, मतली और उल्टी की शिकायत भी हो सकती है।

    हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक दोनों ही काफी गंभीर स्थितियां हैं, जिनमें तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है। 

    कैसे करें बचाव? 

    Heat stroke prevention
    (AI Generated Image)



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