क्या कोई भी चीज देखते ही चुपके से उठा लेने का करता है मन? लालच नहीं, एक बीमारी है इसके पीछे की वजह
सुनने में हैरान करने वाला लग सकता है, लेकिन चोरी करना भी एक तरह का मेंटल डिसऑर्डर हो सकता है। ...और पढ़ें

चोरी करना भी एक मेंटल डिसऑर्डर हो सकता है (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए, एक इंसान जिसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है, फिर भी वह किसी दुकान से कोई मामूली सी चीज चुरा लेता है। सुनने में अजीब लगता है न? आमतौर पर हम चोरी को सिर्फ लालच या एक सोची-समझी साजिश मानते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार यह एक गंभीर मानसिक बीमारी होती है? जी हां, मेडिकल साइंस में इस मेंटल डिसऑर्डर को क्लेप्टोमेनिया कहा जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन सी दिमागी उलझन है, जो किसी इंसान को बिना जरूरत के भी चोरी करने पर मजबूर कर देती है।
क्या है क्लेप्टोमेनिया?
क्लेप्टोमेनिया एक तरह का इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर है। इसमें व्यक्ति अपनी तेज इच्छा को रोक नहीं पाता है, जो उसे चोरी करने के लिए मजबूर करती है। सामान्य चोरों के उल्टे, क्लेप्टोमेनिया से पीड़ित व्यक्ति उन चीजों को चुराता है जिनकी उसे असल में जरूरत नहीं होती। अक्सर वे ऐसी चीजें उठाते हैं जिनकी कीमत बहुत कम होती है और जिन्हें खरीदने की क्षमता उनके पास होती है।
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(AI Generated Image)
यह सामान्य चोरी से कैसे अलग है?
एक आम चोर लालच, मजबूरी या बदला लेने के लिए चोरी करता है। लेकिन क्लेप्टोमेनिया का मामले अलग है। इसमें व्यक्ति कोई प्लानिंग नहीं करता, बल्कि अचानक और बिना किसी मदद के चोरी करता है।
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साथ ही, चुराई गई चीजें का उस व्यक्ति के लिए कोई खास महत्व नहीं होता। अक्सर वे इन चीजों को कहीं छिपा देते हैं, दान कर देते हैं या चुपके से वापस उसी जगह रख आते हैं।
इतना ही नहीं, चोरी से पहले व्यक्ति को बहुत तनाव भी महसूस होता है और चोरी के बाद एक तरह की संतुष्टि मिलती है, जो बाद में गिल्ट का रूप ले लेती है।
यह बीमारी क्यों होती है?
हालांकि, क्लेप्टोमेनिया के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन माना जाता है कि ऐसा दिमाग में हुए कुछ बदलावों की वजह से होता है।
- केमिकल इंबैलेंस- हमारे दिमाग में सेरोटोनिन हार्मोन इमोशन और इच्छा को कंट्रोल करता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति अपने व्यवहार पर कंट्रोल खो सकता है। इसके अलावा, चोरी के दौरान निकलने वाला डोपामाइन व्यक्ति को कुछ समय की खुशी देता है, जो उसे बार-बार ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है।
- सीखे हुए व्यवहार- कुछ थ्योरी मानती हैं कि समय के साथ चोरी करने की आदत एक लर्न्ड बिहेवियर बन जाती है, जो धीरे-धीरे एक लत का रूप ले लेती है।
लक्षण और पहचान
- ऐसी वस्तुओं को चुराने की तेज इच्छा जिसे रोकना मुमकिन न हो।
- चोरी करने से पहले बहुत ज्यादा घबराहट या तनाव महसूस करना।
- चोरी करने के तुरंत बाद संतुष्टि या राहत का अनुभव होना।
- चोरी के बाद खुद को दोषी मानना, डरा हुआ महसूस करना या पकड़े जाने का डर सताना।