बिना किसी कॉल या मैसेज के महसूस होता है फोन का वाइब्रेशन? इसके पीछे छिपा है आपके दिमाग का खेल
कई बार बिना किसी नोटिफिकेशन या कॉल के भी लगता है जैसे फोन वाइब्रेट हुआ, लेकिन असल में होता नहीं है। ...और पढ़ें

क्यों बिना वजह महसूस लगता है कि फोन वाइब्रेट हुआ? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि जेब में रखे फोन में वाइब्रेशन हुआ, लेकिन जब आपने चेक किया तो कोई नोटिफिकेशन या कॉल नहीं था? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। ऐसा कई लोगों के साथ होता है और विज्ञान की भाषा में इसे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम कहा जाता है।
इसे एक प्रकार का टैक्टाइल हैल्यूसिनेशन माना जाता है, जहां हमारा दिमाग एक ऐसी चीजों को महसूस करता है जो असल में हुई ही नहीं है। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
दिमाग का ज्यादा अलर्ट होना
आज के डिजिटल युग में हम हर समय किसी न किसी मैसेज या कॉल के इंतजार में रहते हैं। जब हम किसी जरूरी नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग ज्यादा अलर्ट हो जाता है। इस स्थिति में, शरीर की किसी भी सामान्य हलचल को दिमाग गलती से फोन का वाइब्रेशन समझ लेता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
सेंसरिमोटर आदतों का प्रभाव
जब हम लंबे समय तक फोन को जेब में रखते हैं या शरीर के किसी खास हिस्से के पास रखते हैं, तो हमारा दिमाग उस क्षेत्र से आने वाले संकेतों की तरफ ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है।
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चलते समय कपड़ों का त्वचा से छूना, पैर या जांघ की मांसपेशियों में होने वाली हल्की सी हलचल, जैसी इन सामान्य फिजिकल सेंसेशन को दिमाग वाइब्रेशन के पैटर्न के रूप में प्रोसेस कर देता है।
आदत और मनोवैज्ञानिक जुड़ाव
हम अपने स्मार्टफोन से मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं। जो लोग सोशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं या जिन्हें नोमोफोबिया यानी फोन खोने या दूर होने का डर होता है, उनमें फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि हमारा दिमाग डिजिटल दुनिया से जुड़े रहने के लिए कितना बेचैन रहता है।
इससे कैसे बचें?
हालांकि, यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन अगर यह आपको परेशान कर रहा है, तो आप ये तरीके अपना सकते हैं-
- फोन की जगह बदलें- फोन को हमेशा एक ही जेब में न रखें।
- वाइब्रेशन बंद करें- कुछ समय के लिए वाइब्रेशन मोड बंद कर दें।
- डिजिटल डिटॉक्स- दिन में कुछ घंटे फोन को खुद से दूर रखने की आदत डालें।