सिर्फ मेंटल हेल्थ ही नहीं, आपकी स्किन भी बिगाड़ रहा स्ट्रेस; बन सकता है 4 गंभीर समस्याओं की वजह
आमतौर पर मानते हैं कि स्ट्रेस सिर्फ मानसिक सेहत को प्रभावित करता है। लेकिन स्किन पर भी इसका असर दिखाई देता है। ...और पढ़ें

ज्यादा स्ट्रेस के कारण बढ़ सकती हैं त्वचा से जुड़ी समस्याएं (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस और एंग्जायटी हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गए हैं। अक्सर हम मानते हैं कि स्ट्रेस का असर केवल हमारे दिमाग या दिल पर पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मानसिक सेहत आपकी स्किन को भी प्रभावित करती है?
मेडिकल साइंस में यह साबित हो चुका है कि जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर केवल मानसिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी रिएक्ट करता है, जिसका सबसे गहरा असर हमारी स्किन पर दिखता है। आइए समझें कैसे।
तनाव और त्वचा का कनेक्शन
जब हम स्ट्रेस या एंग्जायटी से गुजरते हैं, तो हमारा शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। यह हार्मोन शरीर के इम्यून सिस्टम के बैलेंस को बिगाड़ देता है। इस बदलाव के कारण त्वचा की बाहरी परत कमजोर हो जाती है, घाव भरने की क्षमता कम हो जाती है और शरीर में सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स बढ़ने लगते हैं।

(Picture Courtesy: Freepik
तनाव के कारण होने वाली मुख्य समस्याएं
स्ट्रेस केवल नई समस्याएं पैदा नहीं करता, बल्कि पहले से मौजूद स्किन कंडीशंस को और भी गंभीर बना देता है, जैसे-
- एक्ने- एंग्जायटी के दौरान निकलने वाला कोर्टिसोल हमारी त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को एक्टिव कर देता है। इससे चेहरे पर ज्यादा तेल जमा होता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है और मुंहासों का कारण बनता है।
- सोरियासिस- यह एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। तनाव शरीर की इम्यून रिस्पॉन्स को बदल देता है, जिससे त्वचा के सेल्स का उत्पादन असामान्य रूप से तेज हो जाता है। इसके कारण शरीर पर लाल, पपड़ीदार पैच आने लग जाते हैं।
- अर्टिकेरिया- कई बार बिना किसी बाहरी एलर्जी के ही शरीर पर लाल चकत्ते और खुजली होने लगती है। एंग्जायटी सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को एक्टिव कर देती है, जिससे त्वचा पर स्ट्रेस रैशेज उभर आते हैं।
- एटोपिक डर्मेटाइटिस- तनाव त्वचा की नमी सोखने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे त्वचा रूखी हो जाती है और एक्जिमा या डर्मेटाइटिस जैसी सूजन वाली बीमारियां भड़क उठती हैं।
स्किन बैरियर और रिकवरी पर असर
तनाव न केवल बीमारियों को न्योता देता है, बल्कि त्वचा की मरम्मत करने की शक्ति को भी धीमा कर देता है। स्ट्रेस के कारण त्वचा का बैरियर टूट जाता है, जिससे प्रदूषण और बैक्टीरिया आसानी से त्वचा के अंदर आसानी से जा सकते हैं। अगर आपको कोई चोट लगती है, तो स्ट्रेसफुल कंडीशन में उससे भरने में सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है।