ये हैं बच्चे की कमजोर नजर के 5 शुरुआती संकेत, कहीं आप नजरअंदाज तो नहीं कर रहे?
बच्चों को समय रहते नजर वाला चश्मे लगवाना उनके आंखों की रोशनी को और आगे होने वाले नुकसानों से बचा सकता है। ...और पढ़ें

बच्चों की कमजोर नजर के शुरुआती लक्षण पहचानें (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
बच्चे का आंखों को तिरछा करना या टीवी करीब से देखना
बार-बार आंखें रगड़ना, सिर दर्द या पढ़ाई में ध्यान न लगना
समय पर डॉक्टर से जांच कराकर चश्मा लगवाना महत्वपूर्ण है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों में विजन से जुड़ी परेशानियों का पता ना लगने का असर उनकी पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद पर भी पड़ सकता है। इसलिए, उन लक्षणों का समय रहते पहचान करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें चश्मा लगवाना काफी अहम है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि किन बच्चों को नजर के चश्मे की जरूरत पड़ती है और कैसे इसकी पहचान की जा सकती है।
इन वजहों से बच्चे को लगाना पड़ता है चश्मा
- आंखों की रोशनी में सुधार लाने के लिए
- रोशनी कम हो जाने या लेजी आई की समस्या होने पर
- आंखों की पॉजिशन को बेहतर बनाने के लिए जैसे क्रॉस्ड आई या तिरछापन
- किसी एक आंख में रोशनी कम होने पर विजन सुरक्षित करने के लिए
ऐसे जानें कि आपके बच्चे को चश्मा चाहिए
- स्क्विंटिंग या भैंगापन: इसमें इमेज पर फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे बच्चा आंखों को तिरछा करके चीजों को देखने की कोशिश करता है।
- करीब से टीवी या डिवाइस देखता है: अगर आपका बच्चा बहुत नजदीक से टेलीविजन या मोबाइल देखता है या फिर सिर को नीचे करके पढ़ता है तो यह उसके खराब होते विजन को दर्शाता है।
- बार-बार आंखों को रगड़ना: कभी-कभार ऐसा होना ठीक है, लेकिन वह लगातार अपनी आंखों को रगड़ता है तो यह आई फटीग या स्ट्रेन की निशानी है। यह आंखों की कई अन्य समस्याओं की तरफ इशारा करता है। इसमें एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस भी शामिल है।
- आंखों या सिर में दर्द की शिकायत: अगर दिनभर की पढ़ाई और काम के बाद बच्चा आंखों या सिर में दर्द की शिकायत करता है तो यह आंखों में धुंधलेपन की वजह से हो सकता है।
- स्कूल के काम पर फोकस नहीं कर पाता: स्कूल में बच्चे को दूर और पास की चीजों को देखने के लिए जल्दी-जल्दी अपना विजुअल फोकस बदलना पड़ता है। आंखों में समस्या होने पर बच्चा स्कूल के काम में अपना पूरा ध्यान नहीं लगा पाता।
क्या करें
बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) या स्कूल में आई टेस्ट के दौरान बच्चे की समस्या का पता नहीं लग पाता है तो फिर आंखों के डॉक्टर से जांच कराएं और इन बातों पर ध्यान दें:
- आंखों का एक सीधाई में ना होना
- आंखों की बाहरी और अंदरूनी सेहत
- किसी गंभीर समस्या के लक्षण नजर आने पर
ये भी जानें
बच्चों के विजन का विकास 1 से 7 साल की उम्र में भी होता रहता है। कई बार इस डेवलपमेंट में आने वाली परेशानियों को दूर करने और आंखों के सामान्य विकास में मदद के लिए भी ग्लास या चश्मा लगाने की सलाह दी जाती है।