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रोजाना चिप्स खाना बढ़ा रहा है भूलने की बीमारी का खतरा, रिसर्च ने दावों से सबको चौंकाया

Published: Sat, 27 Jun 2026 07:00 PM (IST)

भागदौड़ वाली जिंदगी में जब हम खाना भूल जाते हैं तो पैकेट फूड की तरफ भागते हैं।

पैकेट फूड्स से बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा (Image Source: AI Generated)

पैकेट फूड्स से बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भागदौड़ वाली जिंदगी में जब हम खाना भूल जाते हैं तो पैकेट फूड की तरफ भागते हैं। इन दिनों तो अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स लोग ऑफिस में काम करते वक्त, मूवी देखते वक्त या छुट्टी वाले दिन आराम करते वक्त खूब खाना पसंद करते हैं। पर इससे जुड़ी एक स्टडी चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि रिसर्च यह दावा कर रही है कि पैकेट वाले फूड्स खाने से व्यक्ति के फोकस करने की क्षमता पर असर पड़ता है। इतना ही नहीं, धीरे-धीरे फोकस का कम होना डिमेंशिया जैसी बीमारी को न्योता दे सकता है। 

चिप्स खाने से शरीर पड़ रहा है ढीला  

ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी ने इस रिसर्च को जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि हाई अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से डिमेंशिया बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। यह रिसर्च साल 2016 में नवंबर महीने से दिसंबर 2023 तक की गई, जिसमें 40-70 की उम्र के करीब 2100 लोगों को शामिल किया गया। 

रिसर्च का नतीजा चौंकाने वाला निकला, इसमें पाया गया कि हर दिन अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स सेवन 10% तक बढ़ाने से व्यक्ति का फोकस कम होता रहता है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि चाहे दिनभर की डाइट में हेल्दी फूड्स भी शामिल हों, तब भी अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का शरीर पर असर यही होगा। रिसर्च यह भी बताती है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स सेवन 10% तक बढ़ाने का मतलब है रोज का चिप्स का एक पैकेट। 

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स इतने नुकसानदायक क्यों? 

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स जिन्हें UPFs भी कहा जाता है, ऐसे इंग्रेडिएंट्स से बने होते हैं जो अमूमन किचन में नहीं होते। इन इंग्रेडिएंट्स में प्रिजर्वेटिव, इमल्सीफायर, स्वीटनर, फैट और आर्टिफिशियल कलर्स शामिल हैं। जब इन्हें बनाने का प्रोसेस शुरू होता है तो मोल्डिंग और एक्सट्रूज़न जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। फिर चाहे वो फूड्स चिप्स, एनर्जी ड्रिंक्स या कैन्डी ही क्यों न हो। 

पैकेट फूड्स से बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा 

रिसर्च में बताया गया है कि रोजाना खाए जाने वाले पैकेट फूड्स डिमेंशिया के साथ-साथ दिल की बीमारी और मोटापे को बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार हैं। इन फूड्स में शामिल प्रिजर्वेटिव, स्वीटनर, फैट और आर्टिफिशियल कलर्स सोचने-समझने की क्षमता को कम करती हैं। जान लेने वाली बात यह है कि स्टडी में पैकेट फूड्स और याददाश्त खोने के बीच सीधा कनेक्शन नहीं पाया गया है। 

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Source: Monash University Research 

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