विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हर वक्त स्ट्रेस में रहते हैं, तो संभल जाएं; आपको चुपके से शिकार बना सकती है फैटी लिवर की बीमारी

Published: Fri, 12 Jun 2026 07:00 AM (IST)

क्या आपको लगता है कि Fatty Liver की बीमारी सिर्फ शराब पीने, जंक फूड खाने या मोटापे की वजह से ही होती है? अगर हां, तो आप बिल्कुल गलत हैं।

फैटी लिवर के पीछे सिर्फ खराब डाइट नहीं, 'क्रॉनिक स्ट्रेस' भी है जिम्मेदार (Image Source: AI-Generated)

फैटी लिवर के पीछे सिर्फ खराब डाइट नहीं, 'क्रॉनिक स्ट्रेस' भी है जिम्मेदार (Image Source: AI-Generated) 

HighLights

  1. लगातार रहने वाला तनाव फैटी लिवर की बड़ी वजह है

  2.  तनाव से शरीर में 'कॉर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है

  3. अनदेखी करने पर यह गंभीर बीमारी बन सकती है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम 'फैटी लिवर' के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले खराब खान-पान, मोटापा, डायबिटीज या ज्यादा शराब पीने का खयाल आता है। इन कारणों के बारे में हम सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका एक और बड़ा कारण है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं?

डॉ. अरविंदर सिंह सोइन, चेयरमैन, लिवर ट्रांसप्लांट, मेदांता गुरुग्राम की मानें, तो वह है- लगातार रहने वाला तनाव। जी हां, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना एक आम बात हो गई है। ऑफिस के लंबे काम के घंटे, पैसों की चिंता, अधूरी नींद, पारिवारिक जिम्मेदारियां और हर समय डिजिटल दुनिया से जुड़े रहना- ये सब हमारे शरीर को लगातार 'अलर्ट' मोड में रखते हैं।

हम यह तो जानते हैं कि तनाव हमारे दिमाग को थकाता है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि इसका सीधा असर हमारे लिवर की सेहत पर भी पड़ता है।

stress management fatty liver

(Image Source: AI-Generated)

कैसे तनाव और लिवर आपस में जुड़े हैं?

लिवर हमारे शरीर का मुख्य मेटाबॉलिक हिस्सा है। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, ऊर्जा जमा करता है और पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर शॉर्ट-टर्म चुनौतियों से निपटने के लिए 'कोर्टिसोल' और 'एड्रेनालाईन' जैसे हार्मोन रिलीज करता है।

लेकिन, जब तनाव आपकी जिंदगी का पक्का हिस्सा बन जाता है, तो शरीर में कॉर्टिसोल का लेवल लगातार बढ़ा रहता है, जो हमारे नॉर्मल मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया को बुरी तरह बिगाड़ देता है।

इंसुलिन और लिवर में फैट का जमा होना

रिसर्च बताती हैं कि लगातार तनाव में रहने से शरीर में 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' की समस्या हो सकती है। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से काम नहीं करतीं। इसके कारण:

  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।
  • लिवर की कोशिकाओं के अंदर फैट जमा होने लगती है।

समय के साथ, यह मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर की बीमारी का रूप ले लेता है, जो आज दुनिया भर में बड़ी संख्या में वयस्कों को अपनी चपेट में ले रहा है।

तनाव से बदलती आदतें भी हैं जिम्मेदार

तनाव सिर्फ हमारे हार्मोन ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि यह हमारी आदतों पर भी बुरा असर डालता है। स्ट्रेस में होने पर अक्सर लोग:

  • ज्यादा कैलोरी वाला 'कंफर्ट फूड' खाते हैं।
  • फिजिकल एक्टिविटी करना छोड़ देते हैं।
  • खराब नींद का शिकार होते हैं या तनाव से बचने के लिए अनहेल्दी चीजों का सहारा लेते हैं।

इस पूरी चर्चा में 'नींद' पर खास ध्यान देना जरूरी है। लगातार तनाव हमारी नींद के पैटर्न को खराब करता है। खराब नींद का सीधा संबंध मोटापे, डायबिटीज और फैटी लिवर से पाया गया है। तनाव और अधूरी नींद का यह कॉम्बिनेशन एक ऐसा चक्र बनाता है जो मेटाबॉलिक समस्याओं को बहुत तेजी से बढ़ाता है।

stress management fatty liver

(Image Source: AI-Generated)

क्यों खतरनाक है यह बीमारी?

फैटी लिवर की सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती दौर में यह पूरी तरह से 'साइलेंट' रहता है। कई मरीजों को तब तक कोई लक्षण महसूस नहीं होता, जब तक कि लिवर को भारी नुकसान न पहुंच चुका हो।

अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो फैटी लिवर आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ गंभीर मामलों में लिवर कैंसर तक का कारण बन सकता है।

बचाव और सही समाधान

अच्छी खबर यह है कि फैटी लिवर से बचा जा सकता है और अगर समय पर इसका पता चल जाए, तो इसे रिवर्स भी किया जा सकता है। एक स्वस्थ डाइट और नियमित व्यायाम के साथ-साथ, 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' को लिवर की सेहत का एक बेहद जरूरी हिस्सा माना जाना चाहिए।

तनाव कम करने और अपने मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए आप इन आसान तरीकों को अपना सकते हैं:

  • माइंडफुलनेस और मेडिटेशन
  • योगाभ्यास
  • नियमित व्यायाम
  • खुली हवा और प्रकृति के बीच समय बिताना
  • अपने दोस्तों और करीबियों से मिलना-जुलना
  • भरपूर और अच्छी नींद लेना

अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाए और आपके लिए उसे संभालना मुश्किल हो, तो किसी प्रोफेशनल की मदद लेना भी उतना ही जरूरी है।

जैसे-जैसे लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, हमें फैटी लिवर को देखने का नजरिया बदलना होगा। हमारा लिवर हमारे दिमाग से अलग काम नहीं करता। क्रोनिक स्ट्रेस और मेटाबॉलिक हेल्थ के बीच के इस गहरे कनेक्शन को समझकर ही हम बचाव के लिए एक बेहतर और समग्र रास्ता अपना सकते हैं।

याद रखें, एक स्वस्थ लिवर के लिए सिर्फ अच्छी डाइट ही काफी नहीं है- इसके लिए आधुनिक जिंदगी के तनावों पर सही तरीके से काबू पाना भी उतना ही जरूरी है।

यह भी पढ़ें- 30 की उम्र पार करते ही युवाओं को घेर रही हैं गंभीर बीमारियां... कहीं आप तो नहीं लिस्ट में शामिल?

यह भी पढ़ें- शरीर का 'सिस्टम फेल' कर सकती है लिवर की ये बीमारी, घाव भरने में देरी है पहला बड़ा लक्षण