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    क्या आप जानते हैं शरीर में भी होता है ऑटोमैटिक AC? जानें भीषण गर्मी में यह कैसे करता है काम

    Updated: Thu, 28 May 2026 07:56 PM (IST)

    आज हम आपको बताएंगे कैसे शरीर का प्राकृतिक 'ऑटोमैटिक एसी' (थर्मोरेगुलेशन) भीषण गर्मी का सामना करता है। साथ ही जानेंगे कैस हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक ...और पढ़ें

    शरीर का 'ऑटोमैटिक एसी' कैसे करता है काम? (Picture Credit- AI Generated)

    शरीर का 'ऑटोमैटिक एसी' कैसे करता है काम? (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. शरीर का प्राकृतिक 'थर्मोरेगुलेशन' सिस्टम गर्मी से बचाता है

    2. हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक जानलेवा स्थिति बन सकते हैं

    3. हाइड्रेटेड रहें, हल्के कपड़े पहनें और धूप से बचें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते समय कई लोग यही सोचते कि हमारा शरीर इस भयंकर गर्मी का सामना अंदर ही अंदर कैसे कर रहा है। इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर बताते हैं कि असल में, प्रकृति ने हमारे शरीर के अंदर एक ऑटोमैटिक 'एसी' फिट किया है, जो हमें बाहर की तपिश से बचाता है। 

    लेकिन क्या होता है जब बाहर का तापमान इतना ज्यादा बढ़ जाए कि शरीर का यह कूलिंग सिस्टम भी पूरी तरह से जवाब दे दे? आइए गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. पंकज खटाना से आसान भाषा में समझते हैं कि भीषण गर्मी हमारे शरीर पर क्या असर डालती है और हम खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

    शरीर का अपना इन-बिल्ट कूलिंग सिस्टम

    डॉक्टर बताते हैं कि हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C होता है। इसे स्थिर बनाए रखने के लिए शरीर एक खास प्राकृतिक सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जिसे 'थर्मोरेगुलेशन' कहते हैं। जब बाहर बहुत ज्यादा गर्मी होती है, तो हमारा दिमाग त्वचा के पास मौजूद खून की नसों को फैलने का सिग्नल देता है, ताकि शरीर की अंदरूनी गर्मी बाहर निकल सके। 

    इसके साथ ही हमारे पसीने वाले ग्लैंड्स तेजी से एक्टिव हो जाते हैं। जब त्वचा से पसीना भाप बनकर उड़ता है, तो हमें ठंडक का एहसास होता है। हालांकि, अगर हवा में नमी (Humidity) बहुत ज्यादा हो, तो पसीना जल्दी नहीं सूखता। ऐसे में शरीर को खुद को ठंडा रखने में बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।

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    जब शरीर का सिस्टम हो जाता है ओवरलोड

    लगातार तेज गर्मी में रहने से शरीर से पसीने के रूप में बहुत सारा जरूरी पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। शरीर में पानी की भारी कमी होने पर आपको अचानक थकान, चक्कर आना, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। इस स्थिति को 'हीट एग्जॉस्टशन' (Heat Exhaustion) कहा जाता है।

    अगर इस पर तुरंत ध्यान न दिया जाए और शरीर का तापमान बेकाबू होकर 40°C के पार चला जाए, तो यह 'हीटस्ट्रोक' यानी लू की जानलेवा स्थिति में बदल सकता है। यह एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी है, जो इंसान के दिमाग, दिल और किडनी जैसे बेहद अहम अंगों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

    रात की गर्मी भी है एक साइलेंट किलर

    हीटवेव इसलिए भी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि यह शरीर को आराम करने और रिकवर होने का मौका नहीं देती। कई बार रात में भी तापमान कम नहीं होता, जिससे शरीर का स्ट्रेस लेवल लगातार बढ़ता है। 

    इससे हार्ट और सांस से जुड़ी गंभीर दिक्कतें होने का खतरा बढ़ जाता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बाहर धूप में काम करने वाले लोग और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को इस दौरान सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की सख्त जरूरत होती है।

    भीषण गर्मी में कैसे रखें खुद को कूल और सेफ?

    • खुद को हाइड्रेटेड रखें: प्यास न लगने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में सादा पानी, नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ पीते रहें।
    • सही कपड़ों का चुनाव: हमेशा ढीले, हल्के रंग के और आरामदायक कॉटन कपड़े ही पहनें।
    • धूप से बचें: दोपहर के पीक समय में बाहर जाने से बचें। अगर जाना बहुत जरूरी हो, तो छाता, सनग्लासेस या टोपी का इस्तेमाल जरूर करें।
    • ठंडी जगह पर रहें: कोशिश करें कि हवादार और ठंडी जगहों पर अपना ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।

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