डायबिटीज के मरीजों के लिए वरदान है 'दिन की रोशनी', शुगर कंट्रोल करने का नया वैज्ञानिक तरीका
अक्सर डायबिटीज के मरीज अपने खान-पान और दवाइयों पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ...और पढ़ें

ब्लड शुगर कंट्रोल करना है? तो दिन की रोशनी में बिताएं वक्त (Image Source: Freepik)
HighLights
प्राकृतिक प्रकाश चयापचय और सर्कैडियन रिदम को बेहतर बनाता है
ब्लड शुगर को स्थिर करता है, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है
अध्ययन ने टाइप 2 मधुमेह रोगियों को लाभ की पुष्टि की
आइएएनएस, नई दिल्ली। दिन का प्राकृतिक प्रकाश मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों के लिए कई तरह से फायदेमंद है। यह विटामिन डी उत्पादन, मेटाबालिज्म और सर्केडियन रिदम (शरीर की आंतरिक घड़ी) को बेहतर बनाता है, जिससे ब्लड शुगर के नियंत्रण में मदद मिलती है, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है और फैट आक्सीडेशन (वसा जलना) बढ़ता है, जो समग्र शर्करा संतुलन और एनर्जी मेटाबालिज्म को सुधारता है, साथ ही मूड और प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है।
एक अध्ययन के अनुसार, दिन की रोशनी का सेवन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित लोगों को बेहतर ग्लाइसेमिक नियंत्रण प्राप्त करने में मदद मिलती है। स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी आफ जिनेवा (यूएनआइजीई) और नीदरलैंड के मास्ट्रिच विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग प्राकृतिक प्रकाश के संपर्क में थे, उनके ब्लड शुगर का स्तर दिन में ज्यादा घंटों तक सामान्य रेंज में रहता है और उनमें कम उतार-चढ़ाव होता है।

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प्राकृतिक प्रकाश का लाभकारी प्रभाव
इसके अतिरिक्त उनके मेलाटोनिन स्तर, जो नींद का हार्मोन है शाम के समय थोड़ा अधिक था और वसा आक्सीडेटिव मेटाबालिज्म में भी सुधार हुआ। यह अध्ययन सेल मेटाबालिज्म नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ । इस स्थिति से ग्रसित लोगों पर प्राकृतिक प्रकाश के लाभकारी प्रभाव का पहला प्रमाण प्रस्तुत करता है। यूएनआइजीई में एसोसिएट प्रोफेसर चार्ना डिबनर ने कहा, यह कई सालों से पता है कि सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी मेटाबालिक डिसआर्डर के विकास में एक बड़ी भूमिका निभाती है, जो पश्चिमी आबादी के बढ़ते हिस्से को प्रभावित कर रही है।
65 वर्ष से अधिक आयु के 13 लोगों पर अध्ययन
अध्ययन के लिए टीम ने 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के 13 लोगों को भर्ती किया, ये सभी टाइप 2 मधुमेह से ग्रसित थे । उन्होंने विशेष रूप से डिजाइन किए गए रहने के स्थानों में 4.5 दिन बिताए, जो या तो बड़े खिड़कियों के माध्यम से प्राकृतिक प्रकाश से या कृत्रिम प्रकाश से रोशन थे। चार सप्ताह के कम से कम ब्रेक के बाद वे दूसरे सत्र के लिए लौटे, इस बार दूसरे प्रकाश वातावरण में थे।
विश्लेषण में दिखे सकारात्मक बदलाव
शरीर के मेटाबालिज्म में देखे गए सकारात्मक परिवर्तनों को बेहतर ढंग से समझने के लिए विज्ञानियों ने लोगों से प्रत्येक प्रकाश उपचार से पहले, दौरान और बाद में रक्त और मांसपेशियों के नमूने लिए। उन्होंने कल्चर की गई कंकाल की मांसपेशी कोशिकाओं में आणविक घड़ियों के नियमन के साथ- साथ रक्त में लिपिड, मेटाबोलाइट्स और जीन ट्रांसक्रिप्ट्स का विश्लेषण किया।
कुल मिलाकर नतीजे साफ दिखाते हैं। कि प्राकृतिक रोशनी से आंतरिक घड़ी और मेटाबालिज्म प्रभावित होते हैं। डिबनर ने बताया, यह बेहतर ब्लड शुगर के बेहतर नियमन और दिमाग में सेंट्रल क्लाक और अंगों में मौजूद क्लाक के बीच बेहतर तालमेल का कारण हो सकता है।"
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