चिलचिलाती गर्मी में इन लक्षणों को इग्नोर करना पड़ जाएगा भारी, हीट एग्जॉशन का हो सकते हैं संकेत
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है। इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ सकता है। ...और पढ़ें

गर्मी में रखें अपनी सेहत का ध्यान (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जैसे-जैसे पारा 40°C को छूने की ओर बढ़ रहा है। तपती गर्मी केवल बेचैनी ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में स्थिति अभी से गंभीर होने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा बना हुआ है और 17 अप्रैल तक पारा 40 डिग्री के पार जा सकता है।
ऐसे में सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कि हीटवेव का सेहत पर कैसा असर पड़ता है और किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
शरीर का अंदरूनी संतुलन और डिहाइड्रेशन
ज्यादा गर्मी के कारण शरीर का आंतरिक संतुलन बिगड़ने लगता है। पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी नमक तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर इसकी भरपाई तुरंत न की जाए, तो यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करना शुरू कर देता है।
डिहाइड्रेशन के संकेत
गर्मी का सबसे पहला और सामान्य हमला डिहाइड्रेशन के रूप में होता है। इसकी वजह से थकान, चक्कर आना या सिरदर्द महसूस हो सकता है। अगर इसे मामूली समझकर नजरअंदाज किया जाए, तो यह कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी का कारण बन सकता है।
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पाचन तंत्र पर असर और इन्फेक्शन का खतरा
चिलचिलाती गर्मी सिर्फ प्यास ही नहीं बढ़ाती, बल्कि आपके पाचन को भी बिगाड़ देती है। कई लोगों को भूख न लगना, एसिडिटी या खाने के बाद भारीपन महसूस होने लगता है। इसके अलावा, गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है, जिससे पेट में इन्फेक्शन, डायरिया और उल्टी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक का खतरा
जैसे-जैसे आप ज्यादा समय तक गर्मी के संपर्क में रहते हैं, जोखिम बढ़ता जाता है। हीट एग्जॉशन की स्थिति में व्यक्ति को जी मचलने और मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती है। वहीं, हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति, तेज धड़कन और व्यक्ति बेहोश हो सकता है।

किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?
गर्मी का यह प्रकोप हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को इस दौरान ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है-
- बुजुर्ग और बच्चे- इनके शरीर का टेमप्रेचर कंट्रोल सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पाता है।
- कुछ बीमारियों के मरीज- हार्ट डिजीज, डायबिटीज या किडनी की समस्याओं से जूझ रहे लोगों की स्थिति गर्मी में और बिगड़ सकती है।
- मजदूर और बाहरी काम करने वाले- जो लोग घंटों धूप में रहते हैं, उनमें हीटस्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- प्रेग्नेंट महिलाएं- इन्हें इस दौरान ज्यादा फ्लूएड और एनर्जी की जरूरत होती है।
बचाव ही सबसे बड़ा समाधान
डॉ. शर्मा के अनुसार, बचाव के तरीके काफी आसान हैं। खुद को हाइड्रेटेड रखना, दोपहर के समय सीधी धूप से बचना और ताजा व हल्का खाना खाना आपको सुरक्षित रख सकता है। हीटवेव को केवल मौसम की एक सामान्य घटना समझने की भूल न करें; यह आपके शरीर पर चुपके से वार करती है।