'सबका ख्याल रखा, बस अपना भूल गई...' इस आपाधापी में कब अपनी सेहत को नजरअंदाज करना बंद करेंगी महिलाएं?
कब तक महिलाएं दूसरों के लिए अपनी सेहत का सैक्रिफाइस करेंगी? अब समय आ गया है कि अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हेल्थ को रखा जाए। ...और पढ़ें

बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में खुद को भूलती महिलाएं (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। महिलाएं समाज का वो तबका हैं जो अक्सर सबका ख्याल रखती हैं बस अपना ख्याल रखना भूल जाती हैं। भारत में उन्हें सैंडविच जेनरेशन कहा जाता है यानी बढ़ते बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी उठाने वाली बीच में फंसी हुई पीढ़ी। पर यहां सवाल यह है कि आखिर महिलाएं कब तक अपनी सेहत को सबसे आखिर में रखेंगी? आइए डॉ. मोनिका पंसारी, कंसल्टेंट - ब्रेस्ट और गायनेकोलॉजी ऑन्को-सर्जन (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) और रोबोटिक सर्जन, मणिपाल हॉस्पिटल कनकपुरा रोड से इस बारे में जानें कि कैसे महिलाएं कुछ बातों का ध्यान रखते हुए खुद को भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचा सकती हैं।
बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में खुद को भूलती महिलाएं
डॉ. मोनिका कहती हैं कि एक गायनेकोलॉजिकल कैंसर सर्जन के रूप में मैं अक्सर महिलाओं से एक ही बात सुनती हूं: “डॉक्टर, परिवार की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त थी कि अपनी सेहत पर ध्यान ही नहीं दे पाई।”
यह स्थिति आज 35 से 50 साल की उम्र की बहुत-सी महिलाओं की हकीकत बन चुकी है। इन्हें आज “सैंडविच जेनरेशन” कहा जाता है, क्योंकि ये एक साथ अपने बच्चों की परवरिश, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, घर की जिम्मेदारियां और कई बार नौकरी भी संभाल रही होती हैं। इन सबके बीच सबसे ज्यादा अनदेखी अगर किसी की होती है, तो वह उनकी अपनी सेहत होती है। लगातार तनाव, पूरी नींद न मिलना, अनियमित खान-पान, बढ़ता वजन और व्यायाम के लिए समय न निकाल पाना शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डालता है।
महिलाओं में बढ़ रहा है बीमारियों का खतरा
इन बीमारियों में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा है। महिलाएं अक्सर समय पर डॉक्टर के पास जाने में देर कर देती हैं। इसी उम्र में हार्मोनल बदलाव भी शुरू होने लगते हैं, इसलिए अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना और भी जरूरी हो जाता है।
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डॉ. मोनिका कहती हैं कि महिलाएं शरीर द्वारा दिए जा रहे शुरुआती संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। अगर स्तन में कोई नई गांठ (breast lump) महसूस हो, निप्पल से असामान्य स्राव हो, स्तन की त्वचा में बदलाव दिखाई दे, लंबे समय तक स्तन में दर्द बना रहे, असामान्य योनि से रक्तस्राव हो, रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद दोबारा ब्लीडिंग हो, लगातार पेल्विक दर्द, पेट फूलना या बिना किसी कारण वजन कम होना जैसी समस्याएं हों, तो इन्हें सामान्य समझकर टालना नहीं चाहिए। हर बार ये लक्षण कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन इनकी समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
किन बातों का रखें सबसे ज्यादा ध्यान?
अच्छी बात यह है कि ब्रेस्ट और स्त्री रोगों से जुड़े कई कैंसर नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से शुरुआती अवस्था में ही पकड़े जा सकते हैं।
हर महिला को अपने स्तनों की सामान्य बनावट और बदलावों की जानकारी होनी चाहिए और कोई भी नया परिवर्तन दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
40 साल की उम्र के बाद नियमित मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। अगर परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास हो या अन्य जोखिम कारक मौजूद हों, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार यह जांच पहले भी शुरू की जा सकती है।
वहीं, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए नियमित पैप स्मीयर और एचपीवी (HPV) टेस्ट भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ये जांच कब और कितनी बार करानी चाहिए, यह महिला की उम्र, चिकित्सीय इतिहास (medical history) और पहले की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है।
अपनी सेहत का ध्यान रखना स्वार्थ नहीं
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि महिलाओं का अपनी सेहत का ध्यान रखना स्वार्थ नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आपका परिवार आप पर निर्भर है, लेकिन उन्हें आपकी जरूरत तभी तक है, जब तक आप स्वस्थ हैं। नियमित हेल्थ चेकअप, समय पर स्क्रीनिंग, संतुलित आहार, रोज़ थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को गंभीरता से लेना - ये छोटी-छोटी आदतें भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती हैं। याद रखिए, कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों में समय पर पहचान ही सबसे प्रभावी उपचार की पहली सीढ़ी होती है।