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    डिप्रेशन, मोटापा और साइबर बुलिंग: कहीं आपके बच्चे का भविष्य भी तो खतरे में नहीं?

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 08:05 AM (IST)

    लांसेट कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक एक अरब से ज्यादा किशोर डिप्रेशन, मोटापे और साइबर बुलिंग के खतरे में होंगे। ...और पढ़ें

    पेरेंट्स ध्यान दें! 2030 तक बच्चों के भविष्य पर 3 बड़े खतरों का साया (Image Source: AI-Generated)

    पेरेंट्स ध्यान दें! 2030 तक बच्चों के भविष्य पर 3 बड़े खतरों का साया (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि तेजी से बदलती इस दुनिया में हमारे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य किस दिशा में जा रहा है? वर्तमान में यह एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में जारी की गई 'लांसेट कमीशन ऑन एडोलसेंट हेल्थ' की एक रिपोर्ट ने एक गंभीर चेतावनी दी है।

    इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक दुनिया भर में एक अरब से अधिक किशोर ऐसी परिस्थितियों में जी रहे होंगे, जहां डिप्रेशन, मोटापा और गंभीर चोटें उनके जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएंगी। राहत की बात केवल यह है कि इन समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है, लेकिन अगर हमने अभी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले कुछ ही सालों में ये विकराल रूप ले लेंगी।

    आइए जानते हैं कि वे तीन मुख्य खतरे कौन से हैं जो हमारे बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।

    People pleasing habits

    (Image Source: AI-Generated) 

    मानसिक स्वास्थ्य का गहराता संकट

    आजकल किशोरों में डिप्रेशन और एंग्जायटी बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक युवाओं के जीवन के लाखों स्वस्थ वर्ष केवल मानसिक विकारों की भेंट चढ़ सकते हैं।

    इसके पीछे कुछ मुख्य कारण जिम्मेदार हैं:

    • इंटरनेट और सोशल मीडिया का लगातार बढ़ता दबाव।
    • पर्यावरण और भविष्य को लेकर चिंता।
    • पढ़ाई और करियर में बढ़ती गलाकाट प्रतिस्पर्धा।

    मोटापे की तेजी से बढ़ती महामारी

    एक तरफ जहां कुछ क्षेत्रों में बच्चे आज भी कुपोषण का शिकार हैं, वहीं दूसरी तरफ मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

    खबरें और भी

    • जंक फूड का अत्यधिक सेवन और एक जगह बैठकर समय बिताने वाली जीवनशैली।
    • रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक 46 करोड़ से अधिक युवा मोटापे की चपेट में आ सकते हैं।
    • आगे चलकर यही मोटापा युवाओं में डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देगा।

    दुर्घटनाएं, हिंसा और डिजिटल खतरे

    शारीरिक और मानसिक बीमारियों के अलावा, सुरक्षा में चूक भी इस उम्र के बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। 10 से 24 वर्ष के आयु वर्ग में आज भी मृत्यु के सबसे प्रमुख कारणों में सुरक्षा दुर्घटनाएं शामिल हैं। इसके मुख्य कारण हैं:

    • सड़क दुर्घटनाएं और आपसी शारीरिक हिंसा।
    • आज के डिजिटल युग में 'साइबर बुलिंग' जैसे नए खतरे भी बच्चों की सुरक्षा और मानसिकता पर गहरा असर डाल रहे हैं।

    यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न और अन्य वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से 'द लांसेट जर्नल' के तहत काम करने वाले विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई है। यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। समय आ गया है कि हम अपने बच्चों की जीवनशैली, उनके मानसिक स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा पर गंभीरता से ध्यान दें ताकि 2030 के इस संकट को टाला जा सके।

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